नयी दिल्ली, 23 जनवरी (भाषा) सूरजमुखी और सोयाबीन सहित नरम तेलों (सॉफ्ट आयल) के भारी मात्रा में आयात के कारण देश में इन तेलों की भरमार होने की वजह से दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में सोमवार को लगभग सभी तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट आई। सस्ते आयातित तेलों की भरमार को देखते हुए देश में सरसों की आगामी बंपर पैदावार के खपने की चुनौती पैदा हो गई है।
बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि सस्ते आयातित तेलों की भरमार के कारण पहले का सोयाबीन नहीं खप पा रहा है और अब सरसों की भी बंपर पैदावार आने को तैयार है। सस्ते आयातित तेलों से बाजार पटा रहा तो अधिक लागत वाला सोयाबीन और सरसों कौन खरीदेगा।
सूत्रों ने कहा कि सरकार को तत्काल शुल्कमुक्त आयात प्रणाली की व्यवस्था को रोकते हुए सोयाबीन और सूरजमुखी जैसे नरम खाद्य तेलों पर अधिकतम सीमा तक आयात शुल्क लगाना होगा और इसमें देर करना सरसों या तिलहन उत्पादक किसानों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। इसमें देर करने से स्थिति हाथ से निकल जायेगी और एक बार किसानों को नुकसान पहुंचा तो आगे वे तिलहन खेती से हाथ खींच सकते हैं जो तेल-तिलहन मामले में आत्मनिर्भरता के प्रयासों के खिलाफ जा सकता है।
सूत्रों ने कहा कि सूरजमुखी और सोयाबीन जैसा तेल उच्च आय वर्ग में खाया जाता है इसलिए उनपर कोई विशेष फर्क नहीं आयेगा जबकि कम आयवर्ग को पामोलीन सस्ता मिलता रहेगा।
सूत्रों ने कहा कि आगे भी सरकार खाद्य तेलों की उपलब्धता बढ़ाने के बारे में फैसला करते समय आयात शुल्क कम या समाप्त करने के बजाय सब्सिडी देकर ऐसे खाद्य तेलों को राशन की दुकानों से वितरित कराये ताकि उपभोक्ताओं को राहत का सीधा फायदा मिल सके जैसा कि 80 के दशक में हुआ करता था। अभी तो वैश्विक कीमतों में गिरावट भी है, सरकार ने शुल्कमुक्त आयात की छूट भी दे रखी है लेकिन उपभोक्ताओं को कम दाम के बजाय खाद्य तेल महंगे में खरीदना पड़ रहा है। इसमें सबसे बड़ी अड़चन खुदरा कारोबार करने वाली कंपनियों द्वारा अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) लगभग 30-70 रुपये तक अधिक छापना है। इसकी आड़ में वैश्विक कीमतों में आई गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिल पा रहा है। इसे नियंत्रित करने की जरूरत है और इसके लिए सरकार को सभी कंपनियों को निर्देश देना चाहिये कि वे सरकारी वेबसाइट पर अपने एमआरपी की नियमित तौर पर घोषणा करें ताकि सभी को तेल के वास्तविक दाम का पता लग सके।
सूत्रों ने कहा कि चीन में छुट्टियों के कारण मलेशिया एक्सचेंज दो दिन के लिए बंद है। वहीं शिकॉगो एक्सचेंज फिलहाल आधा प्रतिशत कमजोर है।
सूत्रों ने कहा कि खाद्य तेल सस्ते होते हैं, तो खल महंगा होता है जो पशु आहार और दूध एवं दुग्ध उत्पादों की कीमतों पर असर डालते हैं। खल की समुचित प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण है कि देशी तेल बाजार में खपें और इसके लिए उपयुक्त वातावरण बनाना होगा।
सोमवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन – 6,480-6,490 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली – 6,505-6,565 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 15,480 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,440-2,705 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 12,850 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 2,055-2,085 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 2,015-2,140 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी – 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 12,800 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 12,600 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 10,800 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 8,300 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 11,100 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,850 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 8,900 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना – 5,480-5,560 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 5,220-5,240 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।
भाषा राजेश राजेश अजय
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