नयी दिल्ली, 11 फरवरी (भाषा) केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के सदस्य मोहन कुमार सिंह ने बुधवार को कहा कि भारत ने प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ 42 पारस्परिक सीमा शुल्क सहयोग समझौतों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क पर अंकुश लगाने के लिए अपनी वैश्विक प्रवर्तन क्षमता को काफी मजबूत किया है। इसके अलावा 21 और ऐसे समझौतों पर बातचीत जारी है।
सिंह ने उद्योग मंडल फिक्की- कैस्केड द्वारा आयोजित तस्करी निरोधक दिवस के पांचवें संस्करण को संबोधित करते हुए कहा कि तस्करी एक संगठित, प्रौद्योगिकी-आधारित आर्थिक अपराध में बदल गई है। इसका राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे सीमा शुल्क विभाग और राजस्व खुफिया निदेशालय ने प्रवर्तन प्रयासों को काफी तेज कर दिया है। चालू वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में ही हमने हवाई अड्डों पर लगभग 500 किलोग्राम सोना, लगभग 15 करोड़ अवैध सिगरेट, लगभग 120 किलोग्राम कोकीन, लगभग 50 किलोग्राम हेरोइन और लगभग 3,700 किलोग्राम जलीय भांग जब्त की है।’’
सिंह ने कहा कि केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड ने वन्यजीव तस्करी के 100 से अधिक मामलों का पता लगाया है। साथ ही दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं, हथियारों, गोला-बारूद, ड्रोन और नकली घरेलू मुद्रा की जब्ती भी की है।
उन्होंने कहा कि तस्कर गिरोह किसी भी वस्तु तक सीमित नहीं हैं और तकनीकी रूप से बेहद सक्षम हैं। वे पारंपरिक उपायों को डिजिटल तकनीक, जटिल वित्तीय परत और सीमापार समन्वय के साथ जोड़ते हैं।
सिंह कहा, ‘‘अधिकारियों को केवल घटना-आधारित जब्ती तक सीमित न रहकर नेटवर्क-आधारित व्यवधान की ओर बढ़ना होगा। हमें उन वित्तीय प्रवाहों, लॉजिस्टिक सहायकों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को लक्षित करने की आवश्यकता है जो इन अवैध तंत्रों को बनाए रखते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सीमा शुल्क देश की सीमाओं पर रक्षा की पहली पंक्ति के रूप में कार्य करता है। जोखिम-आधारित निरीक्षण, उन्नत कार्गो स्क्रीनिंग, गैर-घुसपैठ वाली जांच प्रणालियों और एआई-संचालित विश्लेषण के माध्यम से, हम संदिग्ध खेपों को घरेलू बाजार में प्रवेश करने से पहले ही पहचान रहे हैं।’’
सीबीआईसी सदस्य ने हाल ही में घोषित केंद्रीय बजट का हवाला देते हुए कहा कि एआई-आधारित इमेज एनालिटिक्स और प्रमुख बंदरगाहों पर कंटेनर स्कैनिंग के विस्तार से प्रवर्तन क्षमताएं और मजबूत होंगी, जबकि जीएसटी सरलीकरण और सीमा शुल्क सुधार अनुपालन को बढ़ावा देंगे तथा अवैध व्यापार के लिए प्रोत्साहन को कम करेंगे।
सामूहिक अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई का जिक्र करते हुए फिक्की कैस्केड के चेयरमैन अनिल राजपूत ने कहा, ‘‘तस्करी से लड़ना किसी एक संस्था या एक देश की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। कानूनी व्यापार को बढ़ावा देने, खुफिया जानकारी साझा करने और अवैध परिचालकों को निर्णायक रूप से दंडित करने के लिए अनुपालन करने वाले देशों के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है।’’
राजपूत ने कहा कि नीति-निर्माताओं द्वारा सही समय पर सही कार्रवाई करना आवश्यक है, क्योंकि किसी भी देरी से अवैध गतिविधियों के और गहराने का जोखिम है, जिसके अर्थव्यवस्था और राष्ट्र के लिए घातक परिणाम हो सकते हैं।
भाषा रमण अजय
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