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Wednesday, 11 March, 2026
होमदेशअर्थजगतन्यायालय ने लौह अयस्क निर्यात मामले में केंद्रीय इस्पात मंत्रालय से जवाब तलब किया

न्यायालय ने लौह अयस्क निर्यात मामले में केंद्रीय इस्पात मंत्रालय से जवाब तलब किया

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नयी दिल्ली, 11 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्रीय इस्पात मंत्रालय से खनन कंपनियों की याचिकाओं पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा। याचिकाओं में कर्नाटक में बेल्लारी, चित्रदुर्ग और तुमुकर स्थित खदानों से निकाले गये लौह अयस्क के निर्यात की अनुमति देने का आग्रह किया गया है।

मुख्य न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायाधीश कृष्ण मुरारी और न्यायाधीश हिमा कोहली की पीठ ने केंद्र की तरफ से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज से कहा कि न्यायालय के समक्ष हलफनामा दायर करने से पहले उसे मीडिया के साथ साझा नहीं करें।

शीर्ष अदालत ने 2012 में कर्नाटक से लौह अयस्क के निर्यात को प्रतिबंधित कर दिया था। इसका मकसद पर्यावरण को होने वाले नुकसान पर अंकुश लगाना तथा यह सुनिश्चित करना था कि राज्य के खनिज संसाधन आने वाली पीढ़ियों के लिये सुरक्षित रहें।

पीठ ने सॉलिसिटर जनरल से पूछा, ‘‘आपका इस बारे में क्या रुख है? क्या आप लौह अयस्क के निर्यात का समर्थन कर रहे हैं? इस बारे में मंगलवार तक अपना रुख स्पष्ट करे।’’

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हम केवल मीडिया में हलफनामा पढ़ते हैं। आज मुझे अदालत में हलफनामा मिला लेकिन उससे पहले मेरे पीआरओ (जन संपर्क अधिकारी) ने कहा कि मैंने अखबार में हलफनामा देखा।’’

इस पर विधि अधिकारी ने कहा, ‘‘यह केंद्र सरकार की तरफ से नहीं होगा।’’

शीर्ष अदालत खनन कंपनियों के आवेदनों पर सुनवाई कर रही है। याचिकाओं में कर्नाटक के तीन जिलों में स्थित खदानों से लौह अयस्क के निर्यात की अनुमति देने का आग्रह किया गया है। उनका कहना है कि केंद्र और केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति दोनों ने उनके आवेदनों को समर्थन किया है।

भाषा

रमण अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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