मुंबई, 28 अगस्त (भाषा) अमेरिका के भारतीय निर्यात पर 50 प्रतिशत का भारी शुल्क लगाए जाने के कारण देश के प्राकृतिक हीरा पॉलिश उद्योग का चालू वित्त वर्ष में राजस्व 28 से 30 प्रतिशत कम होकर 12.50 अरब डॉलर रहने का अनुमान है।
बृहस्पतिवार को जारी एक रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रूसी तेल की खरीद के लिए भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क बुधवार से प्रभावी हो गया। भारत पर अमेरिका द्वारा लगाया गया कुल शुल्क अब 50 प्रतिशत हो गया है।
क्रिसिल रेटिंग्स ने एक रिपोर्ट में कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत में प्राकृतिक हीरा पॉलिश उद्योग का राजस्व लगभग 16 अरब डॉलर था।
पिछले तीन वित्त वर्षों में प्राकृतिक हीरों की कीमतों और बिक्री की मात्रा में 40 प्रतिशत की गिरावट के बाद यह झटका आया है, क्योंकि अमेरिका और चीन में मांग कम हो गई है और प्रयोगशाला में विकसित हीरों से प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है।
क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट में कहा गया कि इस हफ्ते से लागू हुए 50 प्रतिशत शुल्क की वजह से अमेरिका को निर्यात करना मुश्किल हो गया है। इसके दो कारण हैं—पहला, हीरा उद्योग का मुनाफा कम होने की वजह से ये अतिरिक्त शुल्क देना बहुत कठिन है और दूसरा, मांग कम होने की वजह से ये शुल्क सीधे ग्राहक पर डालना भी आसान नहीं होगा।
रिपोर्ट में कहा गया कि इसके परिणामस्वरूप परिचालन क्षमता कम हो सकती है, जिससे हीरा पॉलिश से जुड़ी इकाइयों के लाभ में 0.5 से एक प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति और क्रेडिट प्रोफाइल पर दबाव पड़ेगा।
पॉलिश के कार्यों से जुड़ा हीरा उद्योग अपनी 80 प्रतिशत आय निर्यात से प्राप्त करता है, जबकि अमेरिका भारत के लिए एक प्रमुख बाजार है और इसके निर्यात में 35 प्रतिशत तक का योगदान देता है।
अप्रैल 2025 में 10 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने के बाद बिक्री प्रभावित होने लगी थी, इसलिए, इस वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में भारत के पॉलिश्ड प्राकृतिक हीरों में अमेरिका की हिस्सेदारी 11 प्रतिशत घटकर 24 प्रतिशत रह गई।
लेकिन एक सक्रिय कदम उठाते हुए, हीरा पॉलिश करने वालों ने अमेरिका में अनुमानित त्योहारी मांग को पूरा करने के लिए जुलाई और अगस्त में उत्पादन बढ़ा दिया, जिसके परिणामस्वरूप जुलाई में निर्यात में सालाना आधार पर 18 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
हालांकि, अमेरिका जैसे बाजारों में लैब-निर्मित हीरों की प्रतिस्पर्धा (जिसने मात्रा के हिसाब से पहले ही 60 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी हासिल कर ली है) और चीन में कमजोर मांग राजस्व को लगातार प्रभावित करती रहेगी।
क्रिसिल रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक राहुल गुहा ने कहा, ‘नतीजा यह है कि भारत का घरेलू हीरा उद्योग (जो दुनिया में बने 95 प्रतिशत हीरों की पॉलिशिंग करता है) का राजस्व 2007 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंचने वाला है। सही बात है कि भारत में हीरों की खपत लगातार बढ़ रही है, लेकिन यह बढ़ती मांग अमेरिका और चीन में हो रहे नुकसान की भरपाई करने के लिए पर्याप्त नहीं है…।’’
भाषा योगेश रमण
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