नागपुर, 26 नवंबर (भाष) बंबई उच्च न्यायालय ने चंद्रपुर सुपर थर्मल पावर स्टेशन (सीएसटीपीएस) में कार्यरत परियोजना से प्रभावित लोगों (पीएपी) की सेवा को नियमित करने की मांग वाली रिट याचिका पर महाराष्ट्र सरकार और सीएसटीपीएस को नोटिस जारी किया है।
याचिका में 85 पीएपी ने लंबे समय से चली आ रही उस प्रथा को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें कई वर्षों तक केवल प्रशिक्षु के रूप में रखा जाता है और स्थायी रोजगार का कोई लाभ नहीं दिया जाता।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आशीष फुले ने दायर अर्जी में कहा है कि यह प्रथा 21 जनवरी, 1980 के सरकारी संकल्प (जीआर), महाराष्ट्र परियोजना प्रभावित व्यक्ति पुनर्वास अधिनियम 1999 तथा राज्य की विद्युत उत्पादन और वितरण कंपनियों के प्रशासनिक परिपत्रों का स्पष्ट उल्लंघन है।
याचिका में 26 दिसंबर, 2024 को जारी एक भर्ती विज्ञापन को भी चुनौती दी गई है। आरोप है कि सीएसटीपीएस ने पीएपी के लिए अनिवार्य पांच प्रतिशत आरक्षण कोटा लागू करने में विफल रहा है।
याचिकाकर्ताओं ने कंपनी और राज्य सरकार को उनकी सेवा नियमित करने तथा संबंधित लाभ देने के निर्देश देने की अपील की है।
भाषा
योगेश अजय
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