नयी दिल्ली, तीन अप्रैल (भाषा) अनिवार्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए कच्चे माल की बढ़ती लागत के साथ-साथ सभी संस्करणों में छह एयरबैग जैसी सुविधाओं के लिए उपभोक्ताओं की बढ़ती पसंद के कारण कार विनिर्माता सुस्त मांग के बावजूद कीमतों में बढ़ोतरी कर रहे हैं। उद्योग जगत के दिग्गजों ने यह बात कही है।
अग्रणी ब्रांड मारुति सुजुकी इंडिया ने बुधवार को आठ अप्रैल से विभिन्न मॉडल की कीमतों में 2,500-62,000 रुपये तक की वृद्धि करने की घोषणा की है। इस साल यह उसकी दूसरी वृद्धि है। मारुति सुजुकी इंडिया ने इससे पहले एक फरवरी से विभिन्न मॉडल की कीमतों में 32,500 रुपये तक की वृद्धि की थी।
इसी तरह, बीएमडब्ल्यू ग्रुप इंडिया ने इस महीने से चुनिंदा मॉडल पर तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है।
हुंदै, टाटा मोटर्स, किआ इंडिया और होंडा कार्स ने भी अप्रैल से वाहनों की कीमतें बढ़ाने की योजना की घोषणा की है।
पूरे यात्री वाहन बाजार में सुस्ती के बावजूद कीमतों में वृद्धि करने के सवाल पर मारुति सुजुकी इंडिया के प्रवक्ता ने कहा, “कीमतों में वृद्धि पूरी तरह से नियामकीय बदलावों के कारण कच्चे माल की लागत के चलते की गई है। आंशिक रूप से ऐसी लागत का बोझ ग्राहकों पर डाला गया है।”
बीएमडब्ल्यू ग्रुप इंडिया के अध्यक्ष और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विक्रम पावाह ने कहा, “हम हर तिमाही में इसकी समीक्षा करते हैं और विनिमय दर तथा कच्चे माल की लागत में वृद्धि के कारण हम कीमतों में संशोधन करते हैं। हमने अप्रैल में भी कुछ विशेष मॉडल पर तीन प्रतिशत तक की मामूली मूल्यवृद्धि की थी।”
उद्योग के जानकारों के अनुसार, 3-पॉइंट ईएलआर सीट बेल्ट और सामान रखने के लिए पीछे की सीटों को मजबूत बनाने जैसी सुरक्षा आवश्यकताओं के कारण भारत में यात्री वाहनों की लागत बढ़ गई है।
उद्योग के एक अधिकारी ने कहा, “इसके अलावा, विभिन्न संस्करणों में छह एयरबैग जैसे अधिक सुरक्षा खूबियों की उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग के कारण भी इसकी लागत बढ़ गई है।”
कीमतों में बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब उद्योग में बिक्री में सुस्ती देखी जा रही है और चालू वित्त वर्ष (2025-26) में वृद्धि एक से दो प्रतिशत के दायरे में रहने का अनुमान है।
भाषा अनुराग अजय
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