नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 में छोटे और मझोले उद्योगों (एमएसएमई) को मजबूत करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का अलग एसएमई ग्रोथ फंड शुरू करने का प्रस्ताव रखा है. इस फंड का उद्देश्य नए रोज़गार पैदा करना और योग्य उद्यमों को आगे बढ़ने में मदद करना है.
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार एमएसएमई को आर्थिक विकास की अहम ताकत मानती है. उन्होंने बताया कि इन्हें “भविष्य के चैंपियन” बनाने के लिए तीन स्तरों पर मदद की जाएगी, जिसमें इक्विटी सपोर्ट भी शामिल है.
उन्होंने कहा, “मैं 10,000 करोड़ रुपये का विशेष एसएमई ग्रोथ फंड लाने का प्रस्ताव रखती हूं. इसके साथ ही 2021 में शुरू किए गए आत्मनिर्भर भारत फंड में 2,000 करोड़ रुपये और जोड़े जाएंगे, ताकि सूक्ष्म उद्योगों को जोखिम पूंजी मिलती रहे.”
वित्त मंत्री ने बताया कि अब तक एमएसएमई को 7 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा की लिक्विडिटी सहायता दी जा चुकी है. इस क्षमता का पूरा इस्तेमाल करने के लिए सरकार चार नए कदम उठाएगी.
पहला, केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (CPSEs) द्वारा एमएसएमई से की जाने वाली सभी खरीद के भुगतान के लिए TREDS प्लेटफॉर्म को अनिवार्य किया जाएगा.
दूसरा, TREDS पर इनवॉइस डिस्काउंटिंग के लिए CGTMSE के ज़रिये क्रेडिट गारंटी सपोर्ट दिया जाएगा.
तीसरा, सरकारी खरीद से जुड़ी जानकारी को फाइनेंसरों तक पहुंचाने के लिए GeM पोर्टल को TREDS से जोड़ा जाएगा, जिससे सस्ता और तेज़ कर्ज मिल सके.
चौथा, TREDS पर बने बिलों को एसेट-बैक्ड सिक्योरिटी के रूप में पेश किया जाएगा, ताकि सेकेंडरी मार्केट बने और भुगतान प्रक्रिया आसान हो.
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार 5 लाख से अधिक आबादी वाले टियर-2 और टियर-3 शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर ध्यान देती रहेगी, ताकि ये शहर विकास के नए केंद्र बन सकें.
उन्होंने बताया कि सार्वजनिक पूंजीगत खर्च 2014-15 में 2 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 11.2 लाख करोड़ रुपये हो गया है. वित्त वर्ष 2026-27 में इसे और बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है.
निर्मला सीतारमण ने आज संसद में रिकॉर्ड नौवां लगातार केंद्रीय बजट पेश किया. इससे पहले उन्होंने 2025-26 के लिए आर्थिक सर्वेक्षण भी संसद में रखा था.
आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, 2026-27 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है. वहीं अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान औसत महंगाई दर 1.7 प्रतिशत रही, जो अब तक की सबसे कम दरों में से एक है. आगे भी महंगाई नियंत्रण में रहने की उम्मीद जताई गई है.
