तिरुवनंतपुरम, 26 जुलाई (भाषा) केरल के वित्त मंत्री के एन बालगोपाल ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से यह अनुरोध किया है कि राज्यों की शुद्ध उधारी क्षमता तय करते समय उनके सार्वजनिक खाते में मौजूद राशि और उनकी इकाइयों द्वारा ली गई उधारियों को शामिल न किया जाए।
बालगोपाल ने सीतारमण को लिखे एक पत्र में कहा है कि केरल के समक्ष मौजूद गहरे वित्तीय संकट को देखते हुए उधारी सीमा तय करने के दौरान अगस्त 2017 से पहले की तरह ही सार्वजनिक खाते की राशि और इकाइयों द्वारा ली गई उधारियों को शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा है कि राज्य के वैधानिक निकायों एवं स्वामित्व वाली कंपनियों पर मौजूद देनदारियां राज्य के कर्ज की परिभाषा के दायरे में नहीं आती हैं। ऐसी स्थिति में इन इकाइयों पर मौजूद ऋण बोझ को राज्य सरकार की देनदारी के साथ जोड़ना संविधान के प्रावधानों के विपरीत है।
उन्होंने गत 22 जुलाई को लिए इस पत्र में कहा है कि ऐसा करने से राज्यों की उधार लेने की शक्तियां खतरे में पड़ जाएंगी और उनकी विकास योजनाएं भी प्रभावित होंगी।
हालांकि सीतारमण ने 25 जुलाई को लोकसभा में एक लिखित जवाब में कहा है कि राज्यों की सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों एवं विशेष उद्देश्य से गठित कंपनियों द्वारा ली गई उधारी को भी उस राज्य सरकार की उधारी के रूप में ही माना जाएगा।
भाषा प्रेम
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