नयी दिल्ली, आठ मार्च (भाषा) यूलर मोटर्स के संस्थापक और सीईओ सौरव कुमार ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) स्टार्टअप को लाभ पहुंचाने और देश की हरित गतिशीलता यात्रा में योगदान देने के लिए भारत की ऑटोमोबाइल पीएलआई योजना के मानदंडों में ढील देने की जरूरत है।
कुमार ने पीटीआई-भाषा के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि ऑटो क्षेत्र के लिए पीएलआई में निर्धारित राजस्व और निवेश की उच्च सीमा का मतलब है कि यूलर मोटर्स जैसी कंपनी इस योजना में भाग नहीं ले पाई है। कंपनी छोटे इलेक्ट्रिक ट्रकों और तिपहिया वाहन खंड में सक्रिय है।
ऑटो पीएलआई योजना के पात्रता मानदंडों के अनुसार एक ओईएम का न्यूनतम वैश्विक समूह राजस्व 10,000 करोड़ रुपये होना चाहिए और अचल संपत्तियों में 3,000 करोड़ रुपये का निवेश होना चाहिए।
कुमार ने अफसोस जताते हुए कहा कि दुर्भाग्य से इससे हमारे जैसे स्टार्टअप को प्रोत्साहन नहीं मिला, जो इस क्षेत्र में समान रूप से निवेश कर रहे हैं और तकनीक व आरएंडडी को आगे बढ़ा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उत्पादों के मामले में यूलर मोटर्स के पास इलेक्ट्रिक चार-पहिया और तीन-पहिया वाणिज्यिक कार्गो वाहन दोनों हैं, जो पीएलआई योजना के दायरे में आते हैं।
उन्होंने कहा कि उद्योग में बहुत कम कंपनियां हैं जो वास्तव में चार-पहिया क्षेत्र में भी ईवी को बढ़ावा दे रहे हैं। कुमार ने कहा कि इसलिए सरकार को हममें से अधिकांश को प्रोत्साहित करना चाहिए।
कुमार ने कहा कि केवल अचल संपत्तियों पर जोर देने के बजाय, इसका दायरा स्टार्टअप द्वारा किए गए कुल निवेश तक बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा, ”हमने पहले ही करीब 1,500 करोड़ रुपये का निवेश किया है और अगले दो से ढाई वर्षों में हम 500 से 1,000 करोड़ रुपये का और निवेश करेंगे। हम पहले ही 3,000 करोड़ रुपये के निवेश मानदंड की राह पर हैं।”
भाषा पाण्डेय
पाण्डेय
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