नयी दिल्ली, 25 नवंबर (भाषा) एल्युमिनियम द्वितीयक विनिर्माण संघ (एएसएमए) ने सरकार से प्राथमिक एल्युमिनियम पर आयात शुल्क कम करने का आग्रह किया है। संघ का कहना है कि इससे घरेलू कीमतें नियंत्रित होंगी और ऊंची लागत का सामना कर रहे आपूर्ति श्रृंखला में बाद में आने वाले उद्योगों को राहत मिलेगी।
सैकड़ों एमएसएमई सहित आपूर्ति श्रृंखला में बाद में आने वाले क्षेत्र देश की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
एएसएमए ने सरकार को लिखे पत्र में कहा, ”हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि प्राथमिक एल्युमिनियम पर आयात शुल्क कम किया जाए ताकि घरेलू कीमतें तर्कसंगत स्तर पर आ सकें।”
खनिज एल्यूमिना से इलेक्ट्रोलाइटिक प्रक्रिया द्वारा पहली बार बनाया गया एल्युमिनियम ‘प्राथमिक एल्युमिनियम’ कहलाता है। यह पुनर्चक्रित स्क्रैप से बनने वाले द्वितीयक एल्युमिनियम से अलग होता है।
एएसएमए ने कहा कि आपूर्ति श्रृंखला में बाद में आने वाले क्षेत्र गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है, जिससे इसकी प्रतिस्पर्धात्मकता खतरे में पड़ गई है। संघ ने कहा, ‘‘हम घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में अपनी हिस्सेदारी खो रहे हैं।’’
प्राथमिक एल्युमिनियम पर 7.5 प्रतिशत आयात शुल्क के कारण देशी प्राथमिक उत्पादकों के एल्युमिनियम की लागत बढ़ गई है। आपूर्ति श्रृंखला में बाद में आने वाले उद्योगों की कुल उत्पादन लागत में प्राथमिक एल्युमिनियम का हिस्सा लगभग 80 प्रतिशत है। इसलिए यह बढ़ी हुई लागत बिक्री मूल्य को काफी बढ़ा देती है।
उन्होंने कहा कि ऐसे में भारतीय एल्युमिनियम उत्पाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे हैं। यहां तक कि घरेलू बाजार में भी भारत-आसियान जैसे मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के तहत तैयार माल शून्य शुल्क पर भारत में आ रहे हैं।
भाषा पाण्डेय अजय
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