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Tuesday, 10 March, 2026
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पश्चिम एशिया तनाव के बीच केंद्र ने एसेंशियल कमोडिटीज़ एक्ट लगाकर गैस सप्लाई पर नियंत्रण किया

गजट नोटिफिकेशन में घरेलू ईंधन, ट्रांसपोर्ट गैस और उर्वरक सेक्टर को प्राथमिकता दी गई, क्योंकि पश्चिम एशिया में तनाव से ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है.

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने मंगलवार को एसेंशियल कमोडिटीज़ एक्ट लागू करते हुए नेचुरल गैस (सप्लाई रेगुलेशन) ऑर्डर, 2026 नाम से गजट नोटिफिकेशन जारी किया. यह फैसला पश्चिम एशिया में चल रहे ईरान–अमेरिका–इज़रायल संघर्ष के कारण संभावित गैस सप्लाई की कमी की चिंता के बीच लिया गया है.

इस नोटिफिकेशन में अलग-अलग सेक्टरों के लिए प्राकृतिक गैस की सप्लाई को प्राथमिकता के आधार पर तय किया गया है, ताकि अगर सप्लाई में रुकावट आए तो ज़रूरी ज़रूरतों के लिए गैस उपलब्ध रहे.

इस आदेश के तहत सरकार ने चार प्राथमिकता वाले सेक्टर तय किए हैं, जहां गैस सप्लाई को नियंत्रित और सुनिश्चित किया जाएगा.

प्राथमिकता सेक्टर 1 में ज़रूरी ज़रूरतों के लिए 100 प्रतिशत गैस सप्लाई अनिवार्य की गई है. इसमें घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी), ट्रांसपोर्ट के लिए कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी), एलपीजी से जुड़ी कमी की ज़रूरतें, साथ ही पाइपलाइन कंप्रेसर ईंधन और गैस पाइपलाइन के दूसरे ज़रूरी संचालन से जुड़े काम शामिल हैं.

प्राथमिकता सेक्टर 2 में उर्वरक संयंत्रों को प्राकृतिक गैस की सप्लाई पिछले छह महीने की औसत खपत के 70 प्रतिशत के बराबर दी जाएगी. यह उपलब्धता पर निर्भर करेगा.

प्राथमिकता सेक्टर 3 के तहत गैस मार्केटिंग कंपनियों को चाय उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और राष्ट्रीय गैस ग्रिड से जुड़े अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को पिछले छह महीने की औसत खपत का 80 प्रतिशत गैस सप्लाई बनाए रखनी होगी.

प्राथमिकता सेक्टर 4 में कहा गया है कि सभी सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) कंपनियां यह सुनिश्चित करेंगी कि उनके नेटवर्क से जुड़े औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को पिछले छह महीने की औसत गैस खपत का 80 प्रतिशत गैस मिलती रहे.

यह नोटिफिकेशन प्राकृतिक गैस के उत्पादन, आयात, मार्केटिंग, ट्रांसपोर्ट या सप्लाई से जुड़े सभी संस्थानों पर लागू होगा.

इनमें ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन, रिलायंस इंडस्ट्रीज़, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन और गेल इंडिया लिमिटेड जैसी कंपनियां शामिल हैं. इसके अलावा एलएनजी टर्मिनल ऑपरेटर, प्राकृतिक गैस पाइपलाइन ऑपरेटर और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियां भी इसके दायरे में आएंगी.

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पश्चिम एशिया में ऊर्जा सप्लाई चेन में रुकावट की वजह से भारत में प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम गैस की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है. भारत अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र से बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है.

सरकार ने एसेंशियल कमोडिटीज़ एक्ट लागू करने का फैसला इसलिए लिया है ताकि अगर वैश्विक ऊर्जा सप्लाई में और रुकावट आती है, तब भी खासकर घरेलू ईंधन सप्लाई और ट्रांसपोर्ट के लिए गैस की उपलब्धता सुरक्षित रह सके.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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