नयी दिल्ली, 11 सितंबर (भाषा) सरकार ने कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत कंपनियों के त्वरित विलय का दायरा बढ़ाते हुए अधिक श्रेणियों की कंपनियों को सरलीकृत मार्ग से विलय एवं कारोबार विभाजन की सुविधा प्रदान की है। बृहस्पतिवार को एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।
इस संशोधन से कंपनियों के पुनर्गठन में तेजी आने की उम्मीद है। खास तौर पर गैर-सूचीबद्ध कंपनियों एवं समूहों को इससे फायदा होगा और उन्हें न्यायाधिकरण से मंजूरी की लंबी प्रक्रिया का सामना नहीं करना पड़ेगा।
कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने चार सितंबर को एक अधिसूचना जारी कर कंपनियां (समझौते, व्यवस्थाएं और विलय) नियम, 2016 को संशोधित कर दिया। यह बदलाव 2025-26 के आम बजट की उस घोषणा के अनुरूप है जिसमें कारोबारी सुगमता बढ़ाने और अनुमोदनों में देरी कम करने के उपायों का वादा किया गया था।
संशोधित ढांचे के तहत अब दो या अधिक गैर-सूचीबद्ध कंपनियां (सेक्शन आठ वाली कंपनियों को छोड़कर), जो बकाया ऋण, डिबेंचर या जमा की निर्धारित सीमा पूरी करती हैं, त्वरित विलय या विभाजन कर सकती हैं।
इसके अलावा, होल्डिंग कंपनी और उसकी अनुषंगी कंपनी के बीच विलय के लिए इस मार्ग का इस्तेमाल किया जा सकेगा, बशर्ते विलय होने वाली कंपनी सूचीबद्ध न हो। इसी तरह, एक ही होल्डिंग कंपनी की दो या अधिक अनुषंगियों के बीच भी त्वरित विलय की अनुमति होगी।
कंपनी अधिनियम की धारा 233 कुछ श्रेणियों की कंपनियों को केंद्र सरकार की मंजूरी से विलय की सुविधा देती है। अब तक यह मार्ग केवल छोटी कंपनियों, स्टार्टअप और होल्डिंग कंपनियों व उनके पूर्ण-स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनियों के लिए उपलब्ध था।
सरकार ने समय-समय पर इसका दायरा बढ़ाया है। वर्ष 2021 में छोटे उद्यमों और स्टार्टअप को इसके दायरे में लाया गया था जबकि 2024 में विदेशी होल्डिंग कंपनियों और उनकी भारतीय अनुषंगी कंपनियों के ‘रिवर्स फ्लिपिंग’ विलय को भी इसमें शामिल किया गया।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
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