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Sunday, 22 February, 2026
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खाद्य तेल-तिलहन में गिरावट का रुख

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नयी दिल्ली, 14 फरवरी (भाषा) दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में मंगलवार को कारोबार के दौरान कमजोरी का रुख देखने को मिला तथा मूंगफली तेल-तिलहन के अलावा अन्य तेल-तिलहनों के दाम हानि के साथ बंद हुए।

बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज में 0.8 प्रतिशत की तेजी है जबकि शिकॉगो एक्सचेंज कल रात 1.5 प्रतिशत से ज्यादा टूटने के बाद फिलहाल 0.6 प्रतिशत तेज है। सामान्य कारोबार के बीच मूंगफली तेल- तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बंद हुए।

सूत्रों ने कहा कि सरसों, सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन, सोयाबीन तेल और बिनौला तेल कीमतों में गिरावट आने का मुख्य कारण पिछले तीन महीनों में खाद्य तेलों का सामान्य से काफी अधिक मात्रा में आयात होना है। इससे सभी खाद्य तेल-तिलहनों की कीमतों पर भारी दबाव है।

सूत्रों ने कहा कि 80-90 के दशक में, देश में खाद्य तेलों की कमी को पूरा करने के लिए सरकार रैपसीड तेल आयात कर उसे निजी कंपनियों को रिफायनिंग करने के लिए देती थी और उस तेल को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से कम आय वर्ग के बीच वितरित किया जाता था। इस व्यवस्था से किसी भी अंशधारक को कोई परेशानी नहीं होती थी और ग्राहकों को समुचित दाम पर खाद्य तेल मिल जाता था। इससे महंगाई और दूध की कीमतों पर भी कोई असर नहीं होता था।

सूत्रों ने कहा कि कुछ विशेषज्ञ सिर्फ इस कारण से खाद्य तेलों पर आयात शुल्क बढ़ाने की राय व्यक्त करते हैं ताकि बांग्लादेश और नेपाल जैसे दक्षेस देशों से जो शुल्कमुक्त आयात का फायदा उठाते थे वह फिर से शुरु हो जाये। फिलहाल तो आयातित तेलों के भाव अत्यधिक सस्ते होने की वजह से नेपाल और बांग्लादेश से होने वाला आयात ठप पड़ा हुआ है। लेकिन इन सबके बावजूद हम आंख मूंदे नहीं रह सकते। हमें आयातित तेलों से निपटने और देशी तेल-तिलहनों के खपने की कहीं अधिक चिंता होनी चाहिये और इसी वजह से सोयाबीन की तरह सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्क निश्चित तौर पर बढ़ाने के बारे में विचार करना चाहिये। पाम और पामोलीन तेल से हमें अधिक परेशानी नहीं है क्योंकि इसका उपयोग अधिकांशत: निम्न आयवर्ग के लोग करते हैं।

सूत्रों ने कहा कि असल मुद्दा सोयाबीन और सूरजमुखी जैसे ‘सॉफ्ट आयल’ (नरम तेलों) का है जिसका असर हमारे तेल-तिलहन कारोबार पर दिखता है और जिसके कारण देशी तेल-तिलहन के खपने का संकट है। इससे मवेशी चारे और मुर्गीदाने के लिए मिलने वाले खल और डीआयल्ड केक (डीओसी) की कमी होती है। सोयाबीन का तो शुल्कमुक्त आयात रुक गया है मगर अब सूरजमुखी पर आयात शुल्क बढ़ाने का विकल्प आजमाना जरूरी जान पड़ता है। वायदा कारोबार में भी बिनौला खल के दाम में कल के बाद आज दूसरे दिन तेजी देखने को मिली है जिसका सीधा रिश्ता दूध की बढ़ती महंगाई से है।

मंगलवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 5,900-5,950 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली – 6,475-6,535 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 15,450 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,420-2,685 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 12,240 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,965-1,995 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,925-2,050 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी – 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 12,380 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 12,100 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 10,630 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,750 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 10,840 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,430 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 9,450 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना – 5,460-5,590 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 5,200-5,220 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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