नयी दिल्ली, 16 जनवरी (भाषा) खनिकों के निकाय फिमी ने सरकार से प्राथमिक जस्ता उत्पादों के आयात पर मूल सीमा शुल्क बढ़ाकर 7.5 प्रतिशत करने का अनुरोध किया है और कहा है कि देश की जस्ता खपत घरेलू उत्पादन सीमा के भीतर है।
प्राथमिक जस्ता उत्पादों के आयात पर वर्तमान मूल सीमा शुल्क पांच प्रतिशत है।
सरकार को अपने बजट-पूर्व प्रस्तावों में, भारतीय खनिज उद्योग संघ (फिमी) ने कहा कि जस्ता अयस्क से समृद्ध भारत में सालाना 880 केटी(8,80,000 टन) की पर्याप्त प्राथमिक जस्ता बनाने की क्षमता है, जबकि कुल आवश्यकता 660 केटी की है।
इस मांग का लगभग 23 प्रतिशत मूल्यवर्धन खंड पर जोर दिए बिना दक्षिण कोरिया और जापान से मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के तहत शून्य शुल्क पर आयात के जरिये पूरा किया जा रहा है।
इसने कहा है कि घरेलू बाजार में प्राथमिक जस्ता की पर्याप्त उपलब्धता होने के बावजूद, व्यापार समझौतों के माध्यम से शून्य शुल्क पर अन्य देशों से जस्ता के आयात को प्रोत्साहित करना, न्यूनतम क्षेत्रीय मूल्यवर्धन की आवश्यकता के बिना इस तरह का आयात निश्चित रूप से ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के अनुकूल नहीं है।
इसके अलावा, भारत में जस्ता खनन के विकास के लिए अयस्क की खोज के लिए बहुत निवेश किए जाने की आवश्यकता है।
भारत में घरेलू जस्ता उद्योग ने संयंत्र स्थापित करने, खनन के लिए अयस्क की खोज में भारी निवेश किया है और मूल्य श्रृंखला में विभिन्न लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं।
भाषा राजेश राजेश अजय
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