नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर दिशा सालियान की कथित अप्राकृतिक मौत में किसी साजिश और उसके बाद मामले को छिपाने की जांच के लिए केस दर्ज किया है. एफआईआर में एजेंसी ने कई लोगों के खिलाफ जांच की ज़रूरत दर्ज की है, जिनमें शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे और डिनो मोरिया, सूरज पंचोली और रिया चक्रवर्ती जैसे बॉलीवुड अभिनेता शामिल हैं.
एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि आपराधिक मामले में किसी को भी आरोपी नहीं बनाया गया है, लेकिन जांच के दायरे में यह संभावना भी शामिल होगी कि उस समय के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सालियान की मौत की साजिश और मामले को छिपाने में कोई भूमिका निभाई थी या नहीं.
8 जून 2020 को 28 साल की दिशा सालियान की मुंबई के मलाड इलाके में एक ऊंची इमारत से गिरने के बाद मौत हो गई थी. जांच के बाद उनकी मौत को आत्महत्या बताया गया था. उसी साल 14 जून को सुशांत सिंह राजपूत बांद्रा स्थित अपने फ्लैट में मृत पाए गए थे.
एजेंसी ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की उन धाराओं के तहत केस दर्ज किया है, जिनमें आपराधिक साजिश, सामूहिक बलात्कार, हत्या, सबूत गायब करना या अपराधियों को बचाने के लिए गलत जानकारी देना, लोगों को सज़ा से बचाने के इरादे से सरकारी कर्मचारियों द्वारा कानून के निर्देशों का पालन न करना और लोगों को सजा से बचाने के इरादे से सरकारी कर्मचारियों द्वारा गलत रिकॉर्ड तैयार करना जैसे अपराध शामिल हैं.
यह मामला बॉम्बे हाई कोर्ट के दिशा सालियान की मौत की जांच का आदेश देने के कुछ दिन बाद आया है. वह सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर थीं, जिनकी करीब एक हफ्ते बाद आत्महत्या से मौत हो गई थी. दिशा के पिता सतीश सालियान ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई जांच की मांग की थी. उन्होंने कहा था कि मुंबई पुलिस की जांच में बताए गए दावे के मुताबिक उनकी बेटी ने आत्महत्या नहीं की थी. एजेंसी ने राजपूत की अप्राकृतिक मौत की भी जांच की थी और उस समय उनकी गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती समेत कई लोगों से पूछताछ की थी. हालांकि, एजेंसी ने मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की और उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया.
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी की एफआईआर में कहा गया है, “उस समय के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे के पिता, और अन्य लोगों ने भी साजिश और उसके बाद मामले को छिपाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. संबंधित सरकारी कर्मचारी और पुलिस अधिकारी भी केस के कागजात, फाइलों और दूसरे सरकारी रिकॉर्ड को नष्ट करने या दबाने; आधिकारिक रिकॉर्ड में हेरफेर करने; और अपराधियों को बचाने के लिए सरकारी पैसे, कर्मचारियों और पुलिस मशीनरी का गैरकानूनी इस्तेमाल करने के मामले में जांच के दायरे में हैं.” यह एफआईआर दिशा के पिता के आरोपों के आधार पर दर्ज की गई है.
एफआईआर में आगे कहा गया है, “मुख्य अपराधों, आपराधिक साजिश, बाद में आत्महत्या की झूठी कहानी बनाने और फैलाने, और सबूतों को दबाने, नष्ट करने और/या उनमें हेरफेर करने के मामले में जिन लोगों की भूमिका की जांच की जरूरत है, उनमें आदित्य ठाकरे, रोहन रॉय, डिनो मोरिया, सूरज पंचोली, आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, सचिन वाजे, परम बीर सिंह, डीसीपी विशाल ठाकुर, उद्धव ठाकरे, अनिल देशमुख, एपीआई अशोक देवधे, पीआई जगदेव कलापड़, पीआई शैलेंद्र नागरकर, पीआई चिमाजी अढाव, पीआई अर्जुन राजाने, मालवणी पुलिस स्टेशन के संबंधित अधिकारी, देरी से पोस्टमार्टम करने वाले संबंधित डॉक्टर और कर्मचारी…” शामिल हैं.
सीबीआई अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि मामले में किसी को भी आरोपी या मुख्य संदिग्ध नहीं बनाया गया है. यह इस सप्ताह की शुरुआत में बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक है.
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था, “जांच के दौरान जुटाई गई सामग्री के आधार पर अगर जांच अधिकारी की राय में किसी व्यक्ति के खिलाफ उचित संदेह पैदा करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं, तो उसे आरोपी नहीं माना जाएगा.”
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