नयी दिल्ली, तीन दिसंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने कुछ महिला अधिकारियों को ‘स्थायी कमीशन’ देने से इनकार किये जाने के खिलाफ बुधवार को अंतिम दलीलें सुनते हुए कहा कि देश को ‘शॉर्ट सर्विस कमीशन’ (एसएससी) महिला वायुसेना अधिकारियों पर गर्व है, चाहे सशस्त्र बलों में उनकी विशिष्ट भूमिका कुछ भी हो।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने विंग कमांडर सुचेता एडन और अन्य का प्रतिनिधित्व कर रही वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी की दलीलें सुनते हुए ये टिप्पणियां कीं, जिन्होंने ‘स्थायी कमीशन’ से इनकार किए जाने को भेदभावपूर्ण बताया है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘एक व्यवस्था में, हर कर्तव्य एक ज़िम्मेदारी भरा कर्तव्य होता है, चाहे वह ज़मीनी कर्तव्य हो या हवा में… देश को आपकी सेवाओं पर गर्व है। हमें आपकी सेवाओं पर गर्व है।’’
गुरुस्वामी ने सशस्त्र बलों की 2019 की मानव संसाधन नीति का हवाला दिया और यह कहते हुए इसकी आलोचना की कि ‘स्थायी कमीशन’ के लिए विचार किए जाने के मानदंड बदल दिए गए हैं और यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है।
कुछ एसएससी अधिकारियों के विशिष्ट मामलों का उल्लेख करते हुए, वरिष्ठ वकील ने कहा कि उनके पास अपेक्षित सीजीपीए (संचयी ग्रेड प्वाइंट औसत) था, फिर भी उन पर विचार नहीं किया गया क्योंकि क्योंकि वह गर्भवती थीं और मातृत्व अवकाश पर थीं।
उन्होंने विभिन्न निर्णयों का हवाला दिया और कहा कि यह माना गया है कि गर्भावस्था और मातृत्व अवकाश के आधार पर महिला कर्मचारियों के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता।
पीठ 9 दिसंबर को मामले में अंतिम सुनवाई फिर से शुरू करेगी।
भाषा सुभाष पवनेश
पवनेश
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
