नयी दिल्ली, सात मार्च (भाषा) दिल्ली वक्फ बोर्ड ने केंद्र द्वारा उसकी 123 संपत्तियों को सूची से हटाने के फैसले को मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी।
बोर्ड ने तर्क दिया कि ये सभी संपत्तियां या तो दरगाह, मस्जिद या कब्रिस्तान हैं, जो हमेशा उसके कब्जे में रही हैं और दो सदस्यीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर अब इसे नहीं लिया जा सकता है।
अदालत ने मामले को अगले सप्ताह अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राहुल मेहरा ने अदालत से संपत्तियों के कब्जे पर यथास्थिति बनाए रखने के लिए निर्देश देने का आग्रह किया।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने कहा कि केंद्र का पक्ष सुने बिना अंतरिम आदेश पारित नहीं किया जा सकता है। न्यायाधीश ने कहा कि जिस आदेश को चुनौती दी गई है उसके अनुसार, केवल संपत्तियों का भौतिक निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया है।
केंद्र सरकार के वकील ने कहा, ‘‘आज की तारीख में, केवल (संपत्तियों का) निरीक्षण ही हो सकता है।’’
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मुझे उन्हें भी सुनना है।’’
आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय (एचयूए) के भूमि एवं विकास कार्यालय ने हाल में दो सदस्यीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर दिल्ली वक्फ बोर्ड की मस्जिदों, दरगाह और कब्रिस्तान सहित 123 संपत्तियों को अपने कब्जे में लेने का फैसला किया है।
विभाग ने आठ फरवरी को वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अमानतुल्ला खान को लिखे एक पत्र में दो सदस्यीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर 123 संपत्तियों से संबंधित सभी मामलों से दिल्ली वक्फ बोर्ड को मुक्त करने के फैसले के बारे में सूचित किया था।
भाषा शफीक वैभव
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