नयी दिल्ली, आठ जनवरी (भाषा) दिल्ली पुलिस ने मध्य दिल्ली के तुर्कमान गेट हिंसा के सिलसिले में छह और गिरफ्तारियां कीं और फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमित क्षेत्र को ध्वस्त करने के बारे में झूठे दावे करने वाले कम से कम 10 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरों की पहचान की।
इन नयी गिरफ्तारियों के साथ अब तक पकड़े गए लोगों की कुल संख्या 11 हो गई है। इनमें एक नाबालिग भी शामिल है।
उन्होंने बताया कि पुलिस ने कथित तौर पर गुमराह करने वाले ऑडियो मैसेज फैलाने के आरोप में कई व्हाट्सएप समूह को जांच के दायरे में रखा है, और कहा कि वे समाजवादी पार्टी के नेता मोहिबुल्लाह नदवी को जांच में शामिल होने के लिए नोटिस भेजने की योजना बना रहे हैं, जो कथित तौर पर मौके पर मौजूद थे।
दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त मधुर वर्मा ने पहले कहा था, ‘‘शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि नदवी वहां मौजूद थे, लेकिन जब तक तोड़फोड़ शुरू हुई, तब तक वह चले गए थे। इसकी जांच की जा रही है।’’
फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान हिंसा भड़कने के बाद तुर्कमान गेट इलाके में महत्वपूर्ण सबूत इकट्ठा करने के लिए एक फोरेंसिक टीम तैनात की गई थी, जहां पत्थरबाजी की खबरें आई थीं।
अधिकारियों ने बताया कि जांचकर्ताओं ने घटनाक्रम का पुनर्निर्माण करने और इसमें शामिल लोगों की पहचान करने के प्रयासों के तहत घटनास्थल का सावधानीपूर्वक निरीक्षण किया, नमूने एकत्र किए और नुकसान का दस्तावेजीकरण किया।
चल रही जांच में मदद करने और तोड़फोड़ की कार्रवाई के बाद हुई अशांति के लिए जवाबदेही तय करने में सहायता के लिए साक्ष्यों का विश्लेषण किया जाएगा।
पुलिस ने कहा कि मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात को मस्जिद के पास अदालत के आदेश पर चलाए गए अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान व्हाट्सएप वॉयस नोट्स और सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए फैलाई गई गलत सूचनाओं के कारण पत्थरबाज़ी हुई।
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (मध्य) निधिन वलसन ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘हाल ही में गिरफ्तार किए गए छह आरोपियों की पहचान अफान, आदिल, शाहनवाज़, हमज़ा, अथर और उबेद के रूप में हुई है, ये सभी तुर्कमान गेट इलाके के रहने वाले हैं।’’
उन्होंने बताया कि इस मामले में अब तक एक नाबालिग समेत 11 लोगों को पकड़ा जा चुका है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती सुनिश्चित की गई है।
दिल्ली की एक अदालत ने बृहस्पतिवार को पत्थरबाजी मामले में पहले गिरफ्तार किए गए 11 लोगों में से पांच को 13 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
पुलिस ने बताया कि एमसीडी द्वारा मस्जिद को गिराए जाने के आरोप वाले भ्रामक व्हाट्सएप ऑडियो संदेश समुदाय, धार्मिक समूहों और आस-पड़ोस के समूहों में प्रसारित हुए, जिसके कारण इलाके में 200 से अधिक लोग जमा हो गए।
उन्होंने बताया कि आक्रामक या भड़काऊ संदेशों वाले चार से पांच व्हाट्सऐप समूहों पर कड़ी निगरानी रखी गई थी, हालांकि घटना से ठीक पहले कोई नया समूह नहीं बनाया गया था।
अतिरिक्त पुलिस कांस्टेबल ने कहा, ‘‘हमारी टीम पहले ही इनमें से कई व्हाट्सऐप समूहों में शामिल हो गयी थीं और झूठी अफवाहों का सक्रिय रूप से खंडन किया था, जिससे व्यापक लामबंदी को रोकने में मदद मिली।’’
उन्होंने आगे बताया कि एसीपी और एसएचओ ने अमन समिति के सदस्यों, समुदाय के बुजुर्गों और धार्मिक नेताओं से घटना से काफी पहले संपर्क कर यह स्पष्ट कर दिया था कि मस्जिद को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।
पुलिस ने कम से कम 10 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरों की पहचान की है, जिन पर मस्जिद को ध्वस्त किए जाने की अफवाहें फैलाने का आरोप है।
पुलिस ने बताया कि एक महिला इन्फ्लुएंसर को पूछताछ के लिए बुलाया गया है, क्योंकि उसके द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो को पुलिस की सोशल मीडिया निगरानी टीमों ने भ्रामक और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने वाला बताया था।
कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए शुक्रवार को जुमे की नमाज के दौरान अतिरिक्त बल तैनात किया जाएगा।
वलसन ने बताया कि उन्होंने अभियान शुरू होने से कुछ दिन पहले 120 से अधिक मौलवियों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की थी और उन्हें समझाया था कि केवल अवैध अतिक्रमण ही हटाए जाएंगे और मस्जिद को नहीं गिराया जायेगा।
धार्मिक नेताओं को अदालत के आदेश को चुनौती देने के कानूनी विकल्पों के बारे में भी जानकारी दी गई थी।
इस बीच, बृहस्पतिवार को भी कुछ अतिक्रमित हिस्सों को ध्वस्त करने का काम जारी रहा और नगर निगम के कर्मचारियों ने भी घटनास्थल से मलबा हटाया।
एमसीडी के अधिकारियों ने पहले बताया था कि एक नैदानिक केंद्र, एक बारात घर और चारदीवारी सहित लगभग 36,000 वर्ग फुट अतिक्रमित क्षेत्र को खाली करा लिया गया है, जबकि मस्जिद को छुआ तक नहीं गया है।
पुलिस ने तोड़फोड़ स्थल की हवाई फुटेज साझा करते हुए कहा कि ऑपरेशन से पहले और बाद में ली गई वीडियो से स्पष्ट रूप से पता चलता है कि मस्जिद को छुआ तक नहीं गया था।
वलसन ने कहा, ‘अभियान से पहले की फुटेज में मस्जिद, बारात घर और नैदानिक केंद्र सभी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। अदालत का आदेश केवल बारातघर और नैदानिक केंद्र को ध्वस्त करने का था। अतिक्रमण हटाने के अभियान के बाद की वीडियो में मस्जिद पूरी तरह से खड़ी दिखाई दे रही है, जबकि बाकी अतिक्रमित क्षेत्र को खाली करा लिया गया है।’
हिंसा में स्थानीय थाना अधिकारी सहित कम से कम पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए, जब पुलिस और नगर निगम कर्मचारियों पर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकी गईं।
वलसन ने आगे कहा, ‘इलाज के बाद पुलिसकर्मी ड्यूटी पर लौट आए। वे मजबूत अधिकारी हैं।’
पुलिस ने कहा कि आगे की जांच जारी है और चेतावनी दी है कि गलत सूचना फैलाने या सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने का प्रयास करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भाषा रंजन प्रशांत
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