Monday, 8 August, 2022
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मोहम्मद जुबैर पर दिल्ली पुलिस ने लगाई नई धाराएं, न्यायिक हिरासत की भी मांग

पुलिस ने कोर्ट में यह भी कहा कि जुबैर को विदेशों से चंदा मिलता था. दिल्ली पुलिस ने मामले में तीन नई धाराएं - 201 (सबूत नष्ट करने के लिए - प्रारूपित फोन और हटाए गए ट्वीट), 120- (बी) (आपराधिक साजिश के लिए) और विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 के 35, मामले में जोड़ी हैं.

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नई दिल्ली: ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. कथित आपत्तिजनक ट्वीट मामले में दिल्ली पुलिस ने अब जुबैर की 4 दिन की रिमांड खत्म होने पर न्यायिक हिरासत की मांग की है. जुबैर की रिमांड शनिवार को खत्म हो रही है. इसके अलावा पुलिस ने जुबैर पर मामले में साजिश और सबूत नष्ट करने का भी आरोप लगाया है और उसी की संबंधित धाराओं को FIR में भी जोड़ा है. इस बीच, जुबैर के एक कथित आपत्तिजनक ट्वीट के मामले में अतुल श्रीवास्तव को दिल्ली पुलिस के विशेष लोक अभियोजक के रूप में नियुक्त किया गया है.

पुलिस ने कोर्ट में यह भी कहा कि जुबैर को विदेशों से चंदा मिलता था. दिल्ली पुलिस ने मामले में तीन नई धाराएं – 201 (सबूत नष्ट करने के लिए – प्रारूपित फोन और हटाए गए ट्वीट), 120- (बी) (आपराधिक साजिश के लिए) और विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 के 35, मामले में जोड़ी हैं.

विशेष रूप से, एफसीआरए की धारा 35 अधिनियम के किसी भी प्रावधान के उल्लंघन के लिए सजा बताती है कि जो कोई भी इस अधिनियम के किसी प्रावधान या इसके तहत बनाए गए किसी भी नियम या आदेश के उल्लंघन में किसी विदेशी स्रोत से कोई विदेशी योगदान या कोई मुद्रा या सुरक्षा स्वीकार करता है,तो उसे कारावास से (जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी) या जुर्माने से लेकर दोनों से दंड दिए जा सकते हैं. इस बीच, मोहम्मद जुबैर के वकील द्वारा जमानत अर्जी दाखिल की गई है जिस पर आज सुनवाई होने की संभावना है.

4 दिन की पुलिस रिमांड खत्म होने के बाद आरोपी को आज दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया. जुबैर के खिलाफ प्राथमिकी 20 जून को दिल्ली पुलिस विशेष प्रकोष्ठ की आईएफएसओ इकाई के ड्यूटी अधिकारी द्वारा दायर शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी, जो साइबर अपराधों से निपटती है.

इसके बाद जुबैर को गिरफ्तार कर लिया गया और एक ट्विटर पोस्ट के आधार पर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया. इसके बाद पुलिस ने 4 दिन की रिमांड मांगी जो आज खत्म हो रही है.

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दिल्ली पुलिस ने कहा कि जुबैर पूछताछ के दौरान टालमटोल कर रहा था और उसने जांच में सहयोग नहीं किया. दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा, ‘वह सवालों से बचता रहा और न तो जांच के लिए जरूरी तकनीकी उपकरण मुहैया कराए और न ही जांच में सहयोग किया.’

कोर्ट ने पुलिस से मांगा था जवाब

दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर की उस याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा, जिसमें उन्होंने 2018 में एक हिंदू देवता पर किये गये एक कथित आपत्तिजनक ट्वीट से संबंधित एक मामले में अपनी पुलिस रिमांड की वैधता को चुनौती दी है.

न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने याचिका पर नोटिस जारी किया और निचली अदालत के 28 जून के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए जांच एजेंसी को दो सप्ताह का समय दिया.

उल्लेखनीय है कि निचली अदालत ने जुबैर को चार दिन की पुलिस हिरासत में देने का आदेश दिया था.

उच्च न्यायालय ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 27 जुलाई को सूचीबद्ध कर दिया और कहा कि निचली अदालत के समक्ष कार्यवाही वर्तमान (उच्च न्यायालय की) कार्यवाही से प्रभावित हुए बिना जारी रहेगी.

27 जून को हुई थी गिरफ्तारी

दिल्ली पुलिस ने जुबैर को एक ट्वीट के जरिए धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में 27 जून को गिरफ्तार किया था और उसी दिन निचली अदालत ने उन्हें एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था.

अदालत ने कहा कि रिमांड आदेश दो जुलाई को समाप्त हो जाएगा और ‘पुलिस रिमांड का आदेश चार दिनों के लिए है. मुझे दूसरे पक्ष को सुनना होगा. मैं नोटिस जारी करूंगा.’

एक दिन की हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने जुबैर की हिरासत चार दिनों के लिए बढ़ा दी थी.

निचली अदालत के आदेश के मुताबिक, जुबैर को चार दिन की पुलिस हिरासत की अवधि समाप्त होने पर दो जुलाई को उसके समक्ष पेश किया जाएगा.

पुलिस के अनुसार, जुबैर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा-153ए और 295ए के तहत प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं.

पुलिस ने कहा कि यह मामला एक ट्विटर उपयोगकर्ता की शिकायत पर दर्ज किया गया था, जिसने जुबैर पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया था.

जुबैर का प्रतिनिधित्व करने वाली वकील वृंदा ग्रोवर ने दलील दी कि ‘तथाकथित’ आपत्तिजनक ट्वीट मार्च 2018 का है, इसलिए कोई भी अदालत इस मामले का संज्ञान नहीं ले सकती है.

उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि क्या निचली अदालत का आदेश वैध था और क्या इस तरह के मामले में जुबैर की रिमांड भी जरूरी थी?

ग्रोवर ने सवाल किया, ‘क्या मुझे इस तरह से हिरासत में लिया जा सकता है? क्या मेरा मोबाइल फोन और लैपटॉप इस तरह से जब्त किया जा सकता है? यहां यह सवाल है.’

दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका की विचारणीयता के संबंध में आपत्ति जताई और कहा कि प्राथमिकी दर्ज किया जाना केवल ‘कार्यवाही की शुरुआत’ है. उन्होंने कहा कि पुलिस पक्षपातपूर्ण तरीके से काम नहीं कर रही है क्योंकि वह जुबैर को उनके खिलाफ दर्ज एक अन्य प्राथमिकी में क्लीन चिट दे चुकी है.

पुलिस ने जुबैर की हिरासत पांच दिन के लिए बढ़ाने का अनुरोध करते हुए निचली अदालत को बताया था कि आरोपी ने कथित तौर पर लोकप्रिय होने के लिए धार्मिक ट्वीट का इस्तेमाल किया और सामाजिक वैमनस्य पैदा कर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का जानबूझकर प्रयास किया था.


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