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Wednesday, 19 June, 2024
होमदेशदिल्ली पुलिस ने क्लीनिक में रैकेट का किया भंडाफोड़- टेक्नीशियन, स्टाफ के साथ मिलकर करते थे मरीजों की सर्जरी

दिल्ली पुलिस ने क्लीनिक में रैकेट का किया भंडाफोड़- टेक्नीशियन, स्टाफ के साथ मिलकर करते थे मरीजों की सर्जरी

पुलिस ने ग्रेटर कैलाश में अग्रवाल मेडिकल सेंटर से जुड़े 2 डॉक्टरों और 2 टेक्नीशियन को गिरफ्तार किया है. कथित तौर पर अयोग्य लोगों द्वारा की गई सर्जरी के बाद 2 मौतें हुई हैं.

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नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने ग्रेटर कैलाश इलाके में एक निजी स्वास्थ्य सेवा केंद्र से जुड़े दो डॉक्टरों और दो टेक्नीशियन को उचित डिग्री के बिना सर्जरी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है, जिससे कम से कम दो मौतें हुईं.

इस मंगलवार को गिरफ्तार किए गए लोगों में अग्रवाल मेडिकल सेंटर चलाने वाले डॉ. नीरज अग्रवाल, उनकी पत्नी पूजा अग्रवाल (पूर्व टेक्नीशियन), डॉ. जसप्रीत सिंह और लैब टेक्नीशियन महेंद्र सिंह शामिल हैं.

पुलिस ने कहा कि उन्होंने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के एक मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर गिरफ्तारियां कीं, जिसने दो में से एक – असगर अली (45) की मौत पर अपनी राय दी और यह भी सबूत दिया कि सर्जरी अयोग्य लोगों द्वारा की गई थी.

पिछले साल अली की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी की शिकायत के बाद पुलिस जांच हुई, लेकिन हाल ही में इस साल अक्टूबर में 44 वर्षीय जय नारायण की मौत के बाद भी गिरफ्तारियां हुईं. जब पुलिस ने उनके भाई की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 304 ए (लापरवाही के कारण मौत) के तहत एक नया मामला दर्ज किया था.

दक्षिण जिले के पुलिस उपायुक्त चंदन चौधरी द्वारा बुधवार को जारी एक बयान के अनुसार, अली की पत्नी ने 25 अक्टूबर, 2022 को ग्रेटर कैलाश पुलिस स्टेशन में एक लिखित शिकायत दर्ज की. इस शिकायत में उन्होंने कहा कि अली को पिछले साल 19 सितंबर को पित्ताशय की पथरी के इलाज के लिए स्वास्थ्य सेवा केंद्र में भर्ती कराया गया था, लेकिन कथित तौर पर लापरवाही के कारण उनकी मृत्यु हो गई थी.

शिकायतकर्ता, 41 वर्षीय नसीब उल निशा ने आरोप लगाया कि डॉ. अग्रवाल ने शुरू में उन्हें आश्वासन दिया था कि अली का ऑपरेशन 19 सितंबर को “प्रसिद्ध सर्जन” डॉ. जसप्रीत सिंह द्वारा किया जाएगा. हालांकि, निर्धारित सर्जरी से ठीक पहले, उन्होंने कहा कि डॉ. जसप्रीत सिंह अनुपलब्ध हैं और “डॉ” महेंद्र सिंह उनकी जगह पर सर्जरी करेंगे.

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि सर्जरी अंततः डॉ अग्रवाल, “डॉ” महेंद्र सिंह और “डॉ” पूजा अग्रवाल द्वारा सामूहिक रूप से की गई थी, लेकिन उन्हें बाद में “पता चला” कि न तो सिंह और न ही पूजा डॉक्टर थे.

उन्होंने आरोप लगाया कि सर्जरी के तुरंत बाद, उनके पति ने गंभीर दर्द की शिकायत की थी और उन्हें सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया था, जहां पहुंचने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था.

पुलिस के बयान में कहा गया है कि धारा 304 (गैर इरादतन हत्या), 196 (झूठे सबूतों का उपयोग करना), 197 (झूठे प्रमाणपत्र जारी करना या हस्ताक्षर करना), आईपीसी की धारा 198 (झूठे सर्टिफिकेट का इस्तेमाल करना), 201 (साक्ष्य मिटाना) और 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत एफआईआक दर्ज करने के बाद जांच शुरू की गई थी.

डीसीपी चौधरी के बयान के मुताबिक, जांच में पाया गया कि ”…19/09/22 को मृतक असगर अली की सर्जरी के समय…डॉ. जसप्रीत सिंह बाजवा मौजूद नहीं थे.  इसके अलावा, यह भी पता चला कि डॉ. जसप्रीत सिंह ने मृतक की सर्जरी के संबंध में फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे.”

एम्स मेडिकल बोर्ड, जिसने अली के पोस्टमॉर्टम (पीएम) और अन्य रिपोर्टों का अध्ययन किया, ने कहा, “पीएम रिपोर्ट, विसरा विश्लेषण रिपोर्ट, हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट और पूछताछ पत्रों के अवलोकन के बाद, हमारी राय है कि मृत्यु का कारण लेप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टोमी में आई जटिलता है.”

पुलिस ने कहा कि उनके पास “एक गैर-योग्य व्यक्ति द्वारा एक महत्वपूर्ण अंग की योजनाबद्ध सर्जरी के बारे में पर्याप्त सबूत हैं.”

पुलिस के बयान के अनुसार, “…2016 से अब तक विभिन्न शिकायतकर्ताओं द्वारा अग्रवाल मेडिकल सेंटर और डॉ. नीरज अग्रवाल और उनकी पत्नी पूजा अग्रवाल के खिलाफ दिल्ली मेडिकल काउंसिल में लगभग सात शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें लापरवाही के कारण मरीज की जान चली गई.”


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हालिया असफल सर्जरी

इस साल 28 अक्टूबर को दूसरी शिकायत में, शिकायतकर्ता, ईस्ट ऑफ कैलाश के गढ़ी गांव के निवासी मेजर बसोया ने आरोप लगाया कि उनके छोटे भाई जय नारायण की हत्या डॉ. अग्रवाल, उनकी पत्नी पूजा और अग्रवाल मेडिकल सेंटर के अन्य कर्मचारियों ने मिलकर की है.

उन्होंने कहा कि 26 अक्टूबर को पेट में दर्द की शिकायत के बाद उन्होंने जय नारायण को मेडिकल सेंटर में भर्ती कराया. अगले दिन, जय नारायण ने परिवार को फोन करके बताया कि डॉ. अग्रवाल ने एक जरूरी सर्जरी के लिए कथित तौर पर 15,000 रुपये मांगे थे. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उन्होंने राशि का भुगतान किया, जिसके बाद डॉ. अग्रवाल ने अपनी पत्नी और केंद्र के सफाई कर्मचारियों के साथ मिलकर सर्जरी की.

बसोया ने कहा कि सर्जरी के 15 मिनट बाद डॉ. अग्रवाल ने उन्हें बताया कि उनके भाई की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई है. उन्होंने आरोप लगाया कि जिस कमरे में ऑपरेशन किया गया था, उसे कीटाणुरहित नहीं किया गया था, वहां एनेस्थीसिया के लिए कोई “अधिकृत डॉक्टर” नहीं थे, न ही सर्जरी से पहले कोई नैदानिक परीक्षण किया गया था.

इस बीच, एक पुलिस टीम ने मेडिकल सेंटर परिसर के साथ-साथ आरोपियों के आवासों पर भी छापा मारा और 414 खाली और हस्ताक्षरित प्रिस्क्रिप्शन पर्चियां और दो रजिस्टर जब्त किए, जिनमें उन मरीजों के विवरण थे, जिनका केंद्र में गर्भावस्था का चिकित्सीय समापन किया गया था.

पुलिस ने कहा कि टीम ने प्रतिबंधित दवाएं और इंजेक्शन और एक्सपायर्ड सर्जिकल ब्लेड, साथ ही 47 विभिन्न बैंकों की चेकबुक और विभिन्न डाकघरों की पासबुक भी जब्त की हैं.

(संपादन: अलमिना खातून)
(इस ख़बर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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