Wednesday, 29 June, 2022
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‘प्रचार के लिए मुकदमा’- दिल्ली HC ने 5G पर जूही चावला की याचिका खारिज की, 20 लाख का लगाया जुर्माना

याचिका में दावा किया गया था कि 5जी वायरलेस प्रौद्योगिकी योजनाओं से मनुष्यों पर गंभीर, अपरिवर्तनीय प्रभाव और पृथ्वी के सभी पारिस्थितिक तंत्रों को स्थायी नुकसान पहुंचने का खतरा है.

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नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने अभिनेत्री जूही चावला की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने भारत में 5जी तकनीक के रोल-आउट का विरोध किया था.

हाई कोर्ट ने जूही चावल पर 20 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ऐसा लगता है कि ये मुकदमा सिर्फ प्रचार के लिए था. अदालत ने कहा कि वादी जूही चावला ने सुनवाई के लिंक को सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जिससे तीन बार व्यवधान पैदा हुआ.

अदालत ने कहा कि दिल्ली पुलिस उन व्यक्तियों की पहचान करेगी और व्यवधान पैदा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेगी.

जस्टिस जे आर मिड्ढा की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी. इससे पहले बुधवार को भी इस मामले की सुनवाई हुई थी जिसमें अदालत ने इस मामले को ‘दोषपूर्ण’ करार दिया और कहा कि यह ‘मीडिया प्रचार’ के लिए दायर किया गया है.

याचिका में दावा किया गया था कि 5जी वायरलेस प्रौद्योगिकी योजनाओं से मनुष्यों पर गंभीर, अपरिवर्तनीय प्रभाव और पृथ्वी के सभी पारिस्थितिक तंत्रों को स्थायी नुकसान पहुंचने का खतरा है.

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चावला, वीरेश मलिक और टीना वचानी ने याचिका में कहा था कि यदि दूरसंचार उद्योग की 5जी संबंधी योजनाएं पूरी होती हैं तो पृथ्वी पर कोई भी व्यक्ति, कोई जानवर, कोई पक्षी, कोई कीट और कोई भी पौधा इसके प्रतिकूल प्रभाव से नहीं बच सकेगा.

दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को तकनीक से संबंधित अपनी चिंताओं के संबंध में सरकार को कोई प्रतिवेदन दिये बगैर, देश में 5जी वायरलेस नेटवर्क स्थापित करने के खिलाफ जूही चावला के सीधे मुकदमा दायर करने पर सवाल उठाया था.

निजी दूरसंचार कंपनियों का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा था कि 5जी तकनीक सरकार की नीति है और चूंकि यह एक नीति है, इसलिए यह गलत कार्य नहीं हो सकता.

31 मई को जूही चावला ने 5जी के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में मामला दायर किया था.

5जी वायरलेस नेटवर्क्स की पांचवी पीढ़ी है जिसकी गति और क्षमता बहुत तेज होती है. इसे सबसे पहले विकसित करने का काम 2008 में नासा में किया गया था. दुनिया भर के कई देश इस पर अभी रिसर्च और इसे विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं.


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