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Friday, 17 April, 2026
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दिल्ली : कूल्हे की सर्जरी के 24 घंटे बाद ही पैदल चलने लगी बुजुर्ग महिला

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नयी दिल्ली, 10 अक्टूबर (भाषा) घर में गिरने से 105 वर्षीय मोरनी देवी के कूल्हे की हड्डी टूट गई लेकिन ‘हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी’ के 24 घंटे बाद ही वह सहारे के साथ खड़ी हो सकती हैं और चल भी सकती हैं।

शालीमार बाग स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की ओर से शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा गया कि यह प्रक्रिया- बाइपोलर हेमीआर्थ्रोप्लास्टी 30 सितंबर को की गई और लगभग 20 से 25 मिनट तक चली।

चिकित्सकों ने बताया कि यह प्रक्रिया आंशिक हिप रिप्लेसमेंट का एक प्रकार है, जिसमें हिप जोड़ की टूटी हुई बॉल को एक नयी और सुचारू रूप से चलने वाली धातु की बॉल से बदल दिया जाता है।

कूल्हे के फ्रैक्चर के मामलों में गतिशीलता बहाल करने और दर्द कम करने के लिए कभी-कभी क्षतिग्रस्त हिस्से को बदलना आवश्यक होता है।

सर्जरी की इस प्रक्रिया का नेतृत्व करने वाले अस्पताल के रोबोटिक ज्वाइंट रिप्लेसमेंट एवं हड्डी विभाग के वरिष्ठ निदेशक डॉक्टर साइमन थॉमस ने कहा कि उनकी बढ़ती उम्र को लेकर चिंताओं के बावजूद सर्जरी से पहले किए गए मूल्यांकन से पुष्टि हुई कि मोरनी देवी सर्जरी के लिए फिट हैं।

डॉक्टर थॉमस ने कहा, ‘‘ यह मामला इस बात पर प्रकाश डालता है कि उम्र को कभी भी जिंदगी बदल देने वाली सर्जरी के लिए एक सीमा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। सावधानीपूर्वक योजना, शल्य चिकित्सा विशेषज्ञता और शल्य चिकित्सा के बाद की देखभाल के साथ 100 वर्ष से अधिक आयु के रोगी भी गतिशीलता प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन की गुणवत्ता में सुधार कर सकते हैं।’’

अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार भारत में 50 वर्ष से अधिक आयु की लगभग 50 प्रतिशत महिलाएं और 20 प्रतिशत पुरुष कूल्हे के फ्रैक्चर से प्रभावित हैं, तथा अनुमान है कि 2026 तक प्रतिवर्ष इसके छह लाख मामले सामने आएंगे।

इसमें मृत्यु दर 15 प्रतिशत से लेकर 36 प्रतिशत के बीच होती है तथा ठीक होने में प्रायः कई महीनों से लेकर एक वर्ष तक का समय लग सकता है।

इस संदर्भ में देवी का तेजी से स्वस्थ होना इस बात का उदाहरण है कि समय पर इलाज और उन्नत प्रौद्योगिकी से क्या हासिल किया जा सकता है।

मोरनी देवी ने कहा, ‘‘ मैंने फिर से चलने की उम्मीद लगभग छोड़ ही दी थी, लेकिन चिकित्सकों ने मुझे नयी जिंदगी दी। अगले दिन मैं खड़ी हो गयी और अब मैं धीरे-धीरे सहारे से चल पा रही हूं।’’

भाषा रवि कांत रंजन

रंजन

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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