नई दिल्ली: 22 जनवरी को ग्रेटर नोएडा की सूरजपुर कोर्ट पर सबकी नजरें होंगी, जब एक जिला जज 2015 के मोहम्मद अखलाक लिंचिंग मामले को उस फास्ट-ट्रैक कोर्ट से ट्रांसफर करने की याचिका पर सुनवाई करेंगे, जहां अभी ट्रायल चल रहा है.
नतीजे से तय होगा कि मामला एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज सौरभ द्विवेदी के सामने चलता रहेगा या किसी दूसरे जज द्वारा सुना जाएगा.
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर ट्रांसफर याचिका में “मजबूरी वाली परिस्थितियों” का दावा किया गया है, जिसका कारण उन्होंने मौजूदा जज द्वारा ठीक से सुनवाई न होना बताया है.
पिछले हफ्ते गौतम बुद्ध नगर के जिला जज अतुल श्रीवास्तव ने इस पर सुनवाई की थी. हालांकि, बचाव पक्ष द्वारा सहायक दस्तावेज रिकॉर्ड पर रखने के लिए और समय मांगने के बाद कोर्ट ने सुनवाई टाल दी.
अखलाक के परिवार का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील यूसुफ सैफी ने कहा कि कोर्ट ने ट्रांसफर याचिका पर फैसला करने के लिए 22 जनवरी को अगली और आखिरी सुनवाई की तारीख तय की है.
यह मामला फिलहाल रोजाना सुना जा रहा है, क्योंकि फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने इसे “सबसे महत्वपूर्ण” मामला बताया है.
यूपी सरकार की वापसी की याचिका खारिज
यूपी सरकार की ट्रांसफर याचिका सूरजपुर कोर्ट के 23 दिसंबर 2025 के फैसले के बाद आई है, जिसमें सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा वापस लेने की सरकार की अर्जी खारिज कर दी गई थी. कोर्ट ने न सिर्फ इजाजत देने से इनकार किया, बल्कि यह भी आदेश दिया कि ट्रायल को रोजाना सुनवाई के साथ फास्ट-ट्रैक किया जाए.
मामले से जुड़े वकीलों के मुताबिक, इस फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी अपील की जा रही है. अपील अभी दायर नहीं की गई है.
कोर्ट ने अखलाक लिंचिंग मामले में आरोपियों के खिलाफ सभी आरोप वापस लेने की राज्य सरकार की अर्जी खारिज कर दी थी और रोजाना सुनवाई के साथ ट्रायल को फास्ट-ट्रैक करने का आदेश दिया था.
आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 321 के तहत दायर की गई वापसी की अर्जी एक सरकारी वकील को कोर्ट की सहमति से मुकदमे से पीछे हटने की अनुमति देती है. राज्य ने चश्मदीदों के बयानों में विसंगतियों, पुरानी दुश्मनी के सबूतों की कमी और “सामाजिक सद्भाव बहाल करने” की जरूरत का हवाला दिया था.
गौतम बुद्ध नगर के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा 10 सितंबर को जारी एक पत्र में, 26 अगस्त के सरकारी आदेश के बाद, कहा गया था कि राज्यपाल ने सरकारी वकील को राज्य के निर्देश पर काम करने के लिए लिखित अनुमति दे दी है.
2015 दादरी लिंचिंग
मोहम्मद अखलाक को 28 सितंबर 2015 को मार दिया गया था, जब ग्रेटर नोएडा के जारचा पुलिस स्टेशन इलाके के बिसहड़ा गांव में भीड़ ने उनके घर पर हमला किया था. यह हिंसा इस घोषणा के बाद हुई थी कि अखलाक ने एक गाय को मारा था और अपने फ्रिज में बीफ रखा था.
आरोप है कि विशाल राणा और उसके चचेरे भाई शिवम के नेतृत्व में भीड़ ने अखलाक और उसके 22 साल के बेटे दानिश को उनके घर से बाहर खींच लिया और उन पर हमला किया. 52 साल के अखलाक की बाद में नोएडा के एक अस्पताल में मौत हो गई, जबकि दानिश बड़ी हेड सर्जरी के बाद बच गया.
इस घटना से पूरे देश में गुस्सा और भीड़ हिंसा और सांप्रदायिक तनाव पर बहस शुरू हो गई. ये ऐसे मुद्दे हैं जो अब भी कानूनी लड़ाई का हिस्सा हैं, जिसकी 22 जनवरी को एक अहम सुनवाई होने वाली है.
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