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Thursday, 16 April, 2026
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हिरासत में मौत: अदालत ने उन्नाव पीड़िता से अपील दायर करने में 1,940 दिन की देरी का कारण पूछा

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नयी दिल्ली, 16 अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्नाव बलात्कार पीड़िता से उसके पिता की हिरासत में मौत के मामले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर के लिए मृत्युदंड के अनुरोध वाली अपील दायर करने में 1,940 दिन की देरी के बारे में सवाल किया।

न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा की पीठ ने टिप्पणी की कि जब वह घटना से संबंधित अन्य मामलों को आगे बढ़ाने में सक्षम थी, तो इस मामले में देरी क्यों हुई।

पीठ ने पीड़िता के वकील से कहा, ‘‘आप अन्य मामलों की भी पैरवी कर रहे थे। आपको यह बताना होगा कि आप इस मामले की पैरवी क्यों नहीं कर पाए? यही एकमात्र तरीका है जिससे हम आपकी देरी को माफ कर सकते हैं। जब आप अन्य मुकदमों की पैरवी कर रहे थे, जिनमें बलात्कार मामले में अपील भी शामिल थी, तब इस देरी को उचित ठहराने के लिए आपको यह दिखाना होगा कि ऐसा क्यों हुआ?’’

पीड़िता के वकील महमूद प्राचा ने कहा कि वह प्रतिकूल परिस्थितियों में रह रही थी और यह एक ‘‘चमत्कार’’ है कि वह अन्य मामलों को आगे बढ़ा पाई।

वकील ने कहा, ‘‘वह बहुत बोझ से दबी हुई थी। वह इस पर ध्यान नहीं दे पाई। मामले में यही हुआ…यह एक चमत्कार है कि वह उन (मामलों) को आगे बढ़ा सकी। यह चमत्कार है कि वह जिंदा है। यह चमत्कार है कि वह यहां मौजूद है।’’ प्राचा ने पूछा, ‘‘काफी देरी हुई, लेकिन क्या देरी सच्चाई पर हावी हो जाएगी?’’

सेंगर के वकील कन्हैया सिंघल ने कहा कि न्यायिक मंच का इस्तेमाल ‘मीडिया ट्रायल’ के लिए नहीं किया जा सकता और उन्होंने सजा बढ़ाने की पीड़िता की अपील का विरोध किया।

सिंघल ने दलील दी कि पीड़िता उन अपराधों के लिए दोषसिद्धि का अनुरोध कर रही है जो संज्ञान वाले आदेश में शामिल नहीं हैं और उसकी (पीड़िता की) याचिका स्वीकार करने से मामला दस साल पीछे चला जाएगा।

अपने जवाब में, सेंगर ने कहा कि पीड़िता अपील दायर करने में हुई 1,945 दिन की अत्यधिक देरी को उचित ठहराने के लिए ‘‘वाजिब कारण’’ बताने में विफल रही। सेंगर ने यह भी आरोप लगाया कि अपील अनुचित दबाव डालकर आर्थिक वसूली के लिए दायर की गई।

सेंगर को पीड़िता से बलात्कार का दोषी पाया गया और 20 दिसंबर, 2019 को उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। लड़की को 2017 में सेंगर ने तब अगवा कर उससे बलात्कार किया था जब वह नाबालिग थी।

निचली अदालत ने 13 मार्च, 2020 को, बलात्कार पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में सेंगर और उसके भाई जयदीप सेंगर उर्फ ​​अतुल सिंह को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी और उन पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।

भाषा आशीष नेत्रपाल

नेत्रपाल

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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