कोच्चि, 11 अप्रैल (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेता एम. स्वराज की वह याचिका खारिज कर दी जिसमें उन्होंने 2021 के विधानसभा चुनाव में थ्रिप्पुनिथुरा सीट से कांग्रेस नेता और केरल के पूर्व मंत्री के. बाबू के चुनाव को अमान्य घोषित करने की अपील की थी।
स्वराज ने अपनी याचिका में यह आरोप लगाया था कि बाबू ने अपने पक्ष में मत पाने के लिए चुनाव प्रचार के दौरान धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल किया था, लेकिन न्यायमूर्ति पी.जी. अजित कुमार ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया।
अभी अदालत की वेबसाइट पर पूरा आदेश उपलब्ध नहीं है।
स्वराज द्वारा दायर की गई याचिका में बाबू और अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर भगवान अयप्पा के नाम पर वोट मांगने का आरोप लगाया गया था।
माकपा नेता ने आरोप लगाते हुए कहा था कि इसके कारण जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के कई प्रावधानों के तहत भ्रष्ट आचरण से चुनावी प्रक्रिया खराब हुई है।
कांग्रेस और बाबू ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है।
बाबू ने टीवी चैनलों को बताया कि वह फैसले से खुश हैं और उन्हें भरोसा था कि सच अंतत: सामने आएगा, क्योंकि यह उनके खिलाफ “एक मनगढ़ंत मामला” था।
उन्होंने कहा, “हमने अपनी मतदान पर्चियों पर कभी कोई धार्मिक प्रतीक नहीं छापा।”
राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीसन ने टिप्पणी की कि बाबू ने कथित तौर पर माकपा द्वारा अपनाई गई “सभी चालों को मात देते हुए” थ्रिप्पुनिथुरा से 2021 विधानसभा चुनाव जीता था।
उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट में कहा कि उच्च न्यायालय का फैसला लोकतंत्र की जीत है और उन लोगों के चेहरे पर तमाचा है जिन्होंने बाबू की जीत का मजाक उड़ाया था या उस पर सवाल उठाया था।
भाषा प्रशांत माधव
माधव
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
