तिरुवनंतपुरम, दो फरवरी (भाषा) सत्ताधारी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने सोमवार को आरोप लगाया कि केंद्रीय बजट में राज्य की ‘घोर उपेक्षा’ की गयी है और उसने इसे लेकर तीन फरवरी को ‘काला दिवस’ मनाने का आह्वान किया।
एक प्रेस विज्ञप्ति में पार्टी के राज्य सचिवालय ने कहा कि बजट को इस तरह पेश किया गया मानो भारत के मानचित्र पर केरल का अस्तित्व ही न हो।
इसमें बताया गया कि केरल ने बजट से पहले केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने 29 मांगें रखी थीं, लेकिन उनमें से कोई भी स्वीकार नहीं की गई।
माकपा ने कहा कि राज्य को एक भी लंबित परियोजना प्राप्त नहीं हुई है।
पार्टी ने केंद्र सरकार की इस बात के लिए आलोचना की कि उसने एक बार फिर केरल की अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की मांग को नजरअंदाज कर दिया है और रेलवे के विकास के लिए घोषित सात ‘हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर’ से राज्य को बाहर कर दिया है।
इसमें यह भी कहा गया कि विड़िण्गम बंदरगाह के लिए कोई विशेष पैकेज स्वीकृत नहीं किया गया जबकि आयुर्वेद के उद्गम स्थल के रूप में प्रसिद्ध होने के बावजूद केरल को आयुर्वेद एम्स से वंचित कर दिया गया।
इसमें कहा गया कि राज्य को अंतर्देशीय जल परिवहन परियोजनाओं से भी बाहर रखा गया।
माकपा ने कहा कि बजट केरल के पारंपरिक उद्योगों की रक्षा करने में विफल रहा और इसमें विश्वविद्यालयों और टाउनशिप से संबंधित घोषणाओं में राज्य को शामिल नहीं किया गया।
माकपा ने कहा, ‘कल्याणकारी योजनाओं को मजबूत करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है। गरीबों की पूरी तरह से उपेक्षा करके बजट ने केरल को एक और झटका दिया है।’
पार्टी ने बजट को जनविरोधी बताया और कहा कि विरोध प्रदर्शन के तहत तीन फरवरी को सभी बूथ पर काले झंडे फहराए जाएंगे।
इसने लोगों से बजट के खिलाफ प्रदर्शनों में भाग लेने का आह्वान किया।
भाषा
शुभम नरेश
नरेश
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