scorecardresearch
Sunday, 22 March, 2026
होमदेशन्यायालय उपचारात्मक याचिकाओं को अस्वीकार करने के प्रक्रियात्मक मुद्दे की जांच करेगा

न्यायालय उपचारात्मक याचिकाओं को अस्वीकार करने के प्रक्रियात्मक मुद्दे की जांच करेगा

Text Size:

नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय एक प्रक्रियात्मक प्रश्न की जांच करने पर सहमत हो गया है कि क्या उसकी रजिस्ट्री खुली अदालत में पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद उपचारात्मक याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर सकती है और इसे प्रारंभिक अवस्था में ही खारिज कर सकती है।

आम तौर पर पुनर्विचार याचिका का निर्धारण ‘सर्कुलेशन’ के जरिये न्यायाधीशों के अदालत कक्षों में ही किया जाता है, जब तक कि अदालत इसे खुली अदालत में सुनने के लिए सहमत न हो। याचिका के ‘सर्कुलेशन’ के जरिये निपटान का अभिप्राय वकीलों की गैर-मौजूदगी में न्यायाधीशों द्वारा किये गये निर्णय से है।

मृत्युदंड के मामलों में पुनर्विचार याचिकाओं के लिए एक अपवाद बनाया गया है और उनकी सुनवाई खुले न्यायालय में की जाती है।

न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने 18 दिसंबर, 2019 को शीर्ष अदालत के समीक्षा आदेश के खिलाफ मैसर्स ब्रह्मपुत्र कंक्रीट पाइप इंडस्ट्रीज द्वारा दायर एक उपचारात्मक याचिका पर यह आदेश पारित किया।

पीठ ने अपने 23 जनवरी के आदेश में कहा है, ‘इन अपीलों/मामलों में याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि भले ही एक समीक्षा याचिका को खुले न्यायालय में सुना और खारिज कर दिया गया हो, रजिस्ट्री एक उपचारात्मक याचिका को स्वीकार करने से इनकार नहीं कर सकती है और प्रारम्भिक अवस्था में ही खारिज नहीं कर सकती है।’

पीठ ने इस बात का संज्ञान लिया कि कि रजिस्ट्रार (जे-चतुर्थ) ने इस आधार पर उपचारात्मक याचिका दर्ज करने से इनकार कर दिया कि अपीलकर्ताओं/याचिकाकर्ताओं की समीक्षा याचिकाओं को खुली अदालत में सुनवाई के बाद खारिज कर दिया गया था।

पुनर्विचार याचिका सर्वोच्च न्यायालय से अपने फैसले की समीक्षा के लिए अनुरोध है, जबकि उपचारात्मक याचिका निर्णय की त्रुटियों को सुधारकर शिकायतों के लिए न्यायिक उपाय की तलाश करने का अंतिम उपाय है।

भाषा सुरेश माधव

माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments