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Monday, 13 April, 2026
होमदेशन्यायालय ने प्रमाणिक के काफिले पर ‘हमले’ की सीबीआई जांच संबंधी आदेश को दरकिनार किया

न्यायालय ने प्रमाणिक के काफिले पर ‘हमले’ की सीबीआई जांच संबंधी आदेश को दरकिनार किया

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नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में फरवरी में केंद्रीय मंत्री निशीथ प्रमाणिक के काफिले पर हुए कथित हमले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराए जाने का निर्देश देने संबंधी कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश को बृहस्पतिवार को रद्द कर दिया। और इस मुद्दे पर भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी द्वारा दायर जनहित याचिका पर नए सिरे से फैसला सुनाने का निर्देश दिया

शीर्ष अदालत ने राज्य पुलिस द्वारा घटना की जांच पर ‘यथास्थिति’ के लिए पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी की दलीलों को भी खारिज कर दिया। अधिकारी ने कहा था कि ऐसा आदेश नहीं दिये जाने पर राज्य पुलिस इस तथ्य के मद्देनजर ‘‘तेज गति’’ से आगे बढ़ेगी कि कि उसने उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार मामले की फाइल सीबीआई को नहीं दी हैं।

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायूर्ति जे बी पारदीवाला की पीठ ने कहा, ‘‘नहीं, हम ऐसा आदेश पारित नहीं कर सकते।’’

शीर्ष अदालत ने घटना में अब तक की गई कार्रवाई के संबंध में पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दायर ताजा हलफनामे का हवाला दिया और उच्च न्यायालय के सीबीआई जांच के आदेश को खारिज करते हुए कहा, ‘उच्च न्यायालय ने उपरोक्त पहलू में किसी भी बात पर ध्यान नहीं दिया है।’’

पीठ ने कहा, ‘‘हालांकि, निर्णय (उच्च न्यायालय के) के पहले भाग में जो आख्यान निर्धारित किया गया है, उसका इस तथ्य पर असर पड़ता है कि उच्च न्यायालय ने उस सामग्री की संपूर्णता पर गौर नहीं किया, जो उसके सामने याचिकाकर्ताओं ने प्रस्तुत किया था कि क्या उचित जांच (राज्य पुलिस द्वारा) की जा रही है।’’

उसने कहा, ‘‘मामले के इस दृष्टिकोण में, हमारी यह सुविचारित राय है कि कार्यवाही को उच्च न्यायालय में वापस भेजना उचित होगा ताकि वह उस सामग्री पर नए सिरे से विचार कर सके जिसे रिकॉर्ड पर रखा गया है, जिसमें इस अदालत के समक्ष रखी गई आगे की सामग्री भी शामिल है।’’

शीर्ष अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय इस पर नए सिरे से विचार करने के लिए स्वतंत्र होगा कि क्या राज्य पुलिस द्वारा की गई जांच निष्पक्ष और उचित रही है, और यदि नहीं, तो क्या सीबीआई को जांच स्थानांतरित करने का मामला बनता है।

शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के काफिले पर उनके निर्वाचन क्षेत्र कूचबिहार जिले के 25 फरवरी के दौरे के दौरान कथित हमले सहित घटनाओं के संबंध में राज्य पुलिस द्वारा अब तक उठाए गए कदमों का संज्ञान लिया।

इसने कहा कि ये सामग्री स्पष्ट रूप से उच्च न्यायालय के समक्ष थीं, जिसमें यह भी बताया गया था कि वहां के साहिबगंज पुलिस थाने में दर्ज एक स्वत: संज्ञान मामले में राज्य पुलिस द्वारा 21 गिरफ्तारियां की गई थीं और केंद्रीय मंत्री को सुरक्षा प्रदान करने वाली सीआईएसएफ (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर दर्ज प्राथमिकी में तीन और गिरफ्तारियां की गईं।

उसने कहा, ‘‘इसके अलावा यह कहा गया है कि भाजपा समर्थकों द्वारा प्रस्तुत शिकायत के आधार पर 26-27 फरवरी, 2023 को घर के नुकसान और तोड़फोड़ के छह विशिष्ट मामले दर्ज किए गए थे और उन मामलों में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।’’ उसने कहा, ‘‘उच्च न्यायालय ने अपने फैसले के दौरान उपरोक्त किसी भी पहलू पर ध्यान नहीं दिया।’’

शीर्ष अदालत ने नवीनतम जांच के संबंध में राज्य पुलिस के हलफनामे के विवरण का उल्लेख नहीं करते हुए कहा कि ये सामग्री उच्च न्यायालय के फैसले के बाद रखी गई हैं।

पीठ ने सीबीआई जांच संबंधी आदेश को दरकिनार करते हुए कहा, ‘‘हालांकि, फैसले के पहले भाग में जो आख्यान दिया गया है, उसका इस तथ्य पर असर पड़ता है कि उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं द्वारा पेश की गई सामग्री की संपूर्णता पर ध्यान नहीं दिया, जो इस बात पर असर डालती है कि क्या उचित जांच की जा रही थी।’’

राज्य सरकार की अपील का निस्तारण करते हुए पीठ ने कहा कि सीबीआई जांच के लिए अधिकारी की जनहित याचिका की विचारणीयता के संबंध में पुलिस द्वारा उठाई जाने वाली आपत्तियों को वह खुला छोड़ रही है।

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 28 मार्च को सीबीआई को आदेश दिया था कि 25 फरवरी को प्रमाणिक के निर्वाचन क्षेत्र कूच बिहार जिले के दौरे के दौरान उनके काफिले पर कथित हमले की जांच की जाए।

उच्च न्यायालय ने अधिकारी द्वारा दायर जनहित याचिका पर आदेश पारित किया था, जिसमें दिनहाटा के दौरे के दौरान भाजपा सांसद प्रमाणिक को ‘शारीरिक नुकसान पहुंचाने’ की साजिश का आरोप लगाते हुए हमले की सीबीआई जांच की मांग की गई थी।

मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव के नेतृत्व वाली एक खंडपीठ ने घटना के संबंध में दायर मामलों को राज्य पुलिस से सीबीआई को स्थानांतरित करने का आदेश दिया था।

उच्च न्यायालय ने यह कहते हुए कि आरोप सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के खिलाफ हैं, कहा था कि इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है कि राज्य पुलिस निष्पक्ष रूप से जांच नहीं कर सकती, खासकर जब दूसरे पक्ष में राज्य में प्रमुख विपक्षी दल के कार्यकर्ता शामिल हों।

अधिकारी ने आरोप लगाया था कि दिनहाटा के दौरे के दौरान प्रमाणिक की कार पर हमला किया गया था, जहां तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने काफिले पर पत्थर और बम फेंके थे।

यह आरोप लगाया गया था कि बम से कार की खिड़की का शीशा टूट गया था और छर्रे वाहन पर लगे थे जिससे लोग भी हताहत हो सकते थे।

भाषा अमित नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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