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Saturday, 14 February, 2026
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पीएमसी बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक जॉय थॉमस को अग्रिम जमानत देने से अदालत का इनकार

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मुंबई, 20 जनवरी (भाषा) मुंबई की एक अदालत ने पंजाब और महाराष्ट्र सहकारी (पीएमसी) बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक जॉय थॉमस को एक कथित आपराधिक विश्वासघात मामले में यह कहते हुए अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया है कि उनकी संलिप्तता प्रथम दृष्टया स्पष्ट है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एन. जी. शुक्ला ने 16 जनवरी को यह फैसला सुनाया।

जॉय थॉमस बैंक के प्रबंध निदेशक के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान धोखाधड़ी के कई मामलों में आरोपी हैं।

उन्हें 2019 में बैंक में हुए 4,355 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था और वह फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।

ताजा मामला उस समय सामने आया जब पीएमसी बैंक को 2022 में यूनिटी स्मॉल फाइनेंस (यूएसएफ) बैंक ने अपने कब्जे में लिया।

यूएसएफ बैंक की शिकायत पर सात नवंबर 2025 को थॉमस के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 316(5) (आपराधिक विश्वासघात) और 61(2) (आपराधिक साजिश) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

मामला 2018 में बैंक के लिए पनवेल (मुंबई के पास) में कार्यस्थल खरीदने के लिए हुए एक लेन-देन से संबंधित है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, थॉमस ने बिना बोर्ड की स्वीकृति प्राप्त किए और बैंक के नियमों का पालन किए बगैर 14.5 करोड़ रुपये (लगभग पूरी राशि) एक निजी निर्माण कंपनी को अंतरित करने की अनुमति दी थी।

इसके अलावा, सहमति पत्र (एमओयू) को कभी पंजीकृत नहीं किया गया, और अग्रिम भुगतान के बावजूद निर्माण कार्य अधूरा रहा। बैंक को वह कार्यालय स्थल नहीं मिला जो 30 जून, 2018 तक मिलना था।

थॉमस के वकील एच एस काजी ने दलील दी कि वह एमओयू के हस्ताक्षरकर्ता नहीं थे क्योंकि उन्होंने उस समय के प्रमुख प्रबंधक को ‘पावर ऑफ अटॉर्नी’ दी थी।

अतिरिक्त लोक अभियोजक चैत्राली पांषीकर और शिकायतकर्ता यूएसएफ बैंक के वकील रमेश दुबे पाटिल ने अग्रिम जमानत याचिका का कड़ी विरोध किया। उ

दोनों ने कहा कि बैंक के प्रबंध निदेशक के रूप में थॉमस के पास पूरी नियंत्रण था और उन्होंने खरीद से संबंधित सभी प्रमुख निर्णय लिए थे।

पांषीकर और शिकायतकर्ता यूएसएफ बैंक ने जानबूझकर एक कंपनी के निदेशकों से लेन-देन किया था, जो पहले से अन्य अपराधों में आरोपी थे।

अदालत को बताया गया कि कार्यालय स्थल 30 जून, 2018 तक मिलना था और जॉय 2019 तक बैंक के प्रबंध निदेशक थे।

सत्र न्यायाधीश को यह भी बताया गया कि कंपनी की ओर से अनुबंध का पालन न किए जाने पर भी थॉमस ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया।

अदालत ने कहा, “यह स्थिति भी इस अपराध में याचिकाकर्ता की संलिप्तता को दर्शाती है।”

अदालत ने कहा, “लेन-देन की प्रकृति और प्रबंध निदेशक के रूप में याचिकाकर्ता की भूमिका को ध्यान में रखते हुए, उसकी संलिप्तता इस अपराध में स्पष्ट है। इसलिए वह अग्रिम जमानत का पात्र नहीं है।”

भाषा जोहेब माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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