Sunday, 3 July, 2022
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‘कोर्ट आदेश में जालसाज़ी’: ED ने कोलकाता पुलिस के खिलाफ दर्ज की FIR, केंद्र-बंगाल की लड़ाई हुई तेज़

FIR में ED अधिकारियों का दावा है कि कोलकाता पुलिस ने कोर्ट के आदेश से छेड़छाड़ की और संयुक्त निदेशक कपिल राज से उनकी सहमति के बिना उनकी आवाज़ का नमूना ले लिया.

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नई दिल्ली: दिप्रिंट द्वारा देखे गए दस्तावेज़ों से पता चला है कि प्रवर्त्तन निदेशालय (ईडी) ने कोलकाता पुलिस के खिलाफ एक फर्स्ट इनफॉर्मेशन रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की है, जिसमें उस पर कोर्ट के एक आदेश में ‘हेराफेरी और जालसाज़ी’ का आरोप लगाया गया है.

ईडी अधिकारियों ने 20 अप्रैल को दिल्ली पुलिस के पास दर्ज 2022 की एफआईआर 48 में दावा किया है, कि संयुक्त निदेशक कपिल राय की सहमति के बिना उनकी आवाज़ का नमूना लेने के लिए कोर्ट के एक आदेश के साथ छेड़छाड़ की गई. कोलकाता पुलिस ने अभी तक आरोप पर टिप्पणी नहीं की है, लेकिन एक सूत्र ने कहा कि कोर्ट के एक अधिकारी से ‘लिखाई में भूल’ हो गई थी, जिसे ठीक कर लिया गया है.

पिछले महीने अलीपुर की चीफ जुडीशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राज से कोलकाता पुलिस के सामने पेश होकर, अपनी सहमति से जांचकर्त्ताओं को अपनी आवाज़ का एक सैम्पल देने के लिए कहा था. ईडी अधिकारियों का दावा है कि कोलकाता पुलिस ने केंद्रीय एजेंसी को आदेश की जो प्रति उपलब्ध कराई, उसमें से सहमति शब्द का उल्लेख हटा दिया- जो उनके आरोप के मुताबिक़ राज से अपनी इच्छा पूरी कराने की उनकी एक चाल थी.

ये आरोप और एफआईआर पश्चिम बंगाल पुलिस और केंद्र सरकार की प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बढ़ रही लड़ाई का हिस्सा हैं, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और डायमंड हार्बर से तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी से जुड़े कथित अवैध खनन ऑपरेशंस की एक जांच से शुरू हुई थी. अभिषेक पर, जो पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव भी हैं, अवैध खदान संचालकों से पैसा वसूलने का आरोप है.

दिप्रिंट की ओर से फोन कॉल्स के ज़रिए संपर्क करने पर ईडी के संयुक्त निदेशक कपिल राज ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. कोलकाता पुलिस के संयुक्त आयुक्त (अपराध) मुरलीधर शर्मा ने भी टिप्पणी के लिए किए गए दिप्रिंट के अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया.

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समन बनाम समन

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने नवंबर में कोयला खनन मामले की जांच शुरू कर दी थी, जब ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) ने एक एफआईआर दायर की जिसमें कहा गया कि पश्चिम बर्धमान ज़िले में पट्टे की ज़मीनों से, ‘कोयले का व्यापक अवैध खनन और ढुलाई हुई है’. बाद में पैसे का सुराग़ लगाने के लिए ईडी के जांचकर्त्ता भी इस जांच में शामिल हो गए.

2021 के बाद से ईडी की ओर से अभिषेक बनर्जी को सात बार बुलाया गया है, लेकिन वो सिर्फ दो मरतबा पेश हुए हैं. ईडी सूत्रों ने बताया कि इस बीच (अभिषेक की पत्नी) रुजिरा बनर्जी को चार बार तलब किया गया, लेकिन वो अभी तक जांच में शामिल नहीं हुई हैं.

फिर अप्रैल 2021 में, एक राष्ट्रीय टेलीवीज़न चैनल ने कोलकाता-स्थित एक कारोबारी और एक ईडी अधिकारी के बीच कथित बातचीत का एक ऑडियोटेप प्रसारित कर दिया, जिसमें अभिषेक को पैसा वसूलने वाले के तौर पर नामित किया गया था.

अभिषेक ने 5 अप्रैल 2021 को कोलकाता पुलिस के पास एक शिकायत दर्ज कराई, जिसमें कहा गया कि टेलीवीज़न चैनल और ईडी ने उन्हें बदनाम करने के लिए एक साज़िश रची थी.

कोलकाता पुलिस ने कम से कम तीन बार ईडी अधिकारियों को सबूत दर्ज कराने के लिए पेश होने के नोटिस जारी किए, जिसके खिलाफ केंद्रीय एजेंसी कोर्ट पहुंच गई. दिसंबर में दिल्ली हाईकोर्ट ने कोलकाता पुलिस की ओर से जारी सभी नोटिसों पर रोक लगा दी.

फिर मार्च 2022 में अभिषेक और उनकी पत्नी रुजिरा को ईडी के सामने पेशी के समन जारी किए गए. उसके जवाब में कोलकाता पुलिस ने ईडी को अपने अधिकारी के सामने पेश होने के नोटिस जारी कर दिए, जो मानहानि केस की जांच कर रहा है. इन नोटिसों की क़ानूनी वैधता को अदालत में चुनौती दी गई है.


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ED- कोलकाता पुलिस की बढ़ती लड़ाई

दिप्रिंट ने जिन कागज़ात को देखा है उनके अनुसार प्रवर्त्तन निदेशालय अधिकारी दावा करते हैं, कि उनके पास ‘राजनीति से जुड़े कुछ व्यक्तियों और पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के बीच साठ-गांठ’ के सबूत मौजूद हैं.

ईडी का दावा है कि कोलकाता पुलिस के नोटिस ‘अभिषेक बनर्जी और रुजिरा बनर्जी को जारी किए समन का जवाब’ नज़र आते हैं और इनकी मंशा मनी लॉण्डरिंग आरोपों की चल रही जांच को कमज़ोर करना है.

अभिषेक बनर्जी पहले जांच और उनके खिलाफ जारी समन्स को राजनीतिक प्रतिशोध क़रार दे चुके हैं और निदेशालय के सामने पेश होने के बाद उन्होंने ईडी की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए थे.

ईडी-कोलकाता पुलिस लड़ाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकारों के बीच चल रही एक बड़ी राजनीतिक लड़ाई का आईना है.

2019 में सीबीआई और कोलकाता पुलिस ने एक दूसरे के खिलाफ इसी तरह के जवाबी मामले दर्ज कराए थे, जब केंद्रीय एजेंसी ने शारदा पॉन्जी घोटाले में पूर्व पुलिस आयुक्त राजीव कुमार को पेश होने के लिए कहा था.

कोलकाता पुलिस ने सीबीआई के संयुक्त निदेशक पंकज श्रीवास्तव के खिलाफ आपराधिक शिकायतें दर्ज कराईं थीं, जो उस समय जांच प्रभारी थे.

अक्तूबर 2017 के बाद से सीबीआई की ओर से भेजे गए कम से कम आधा दर्जन नोटिसों के जवाब में कमिश्नर कुमार केवल दो बार पेश हुए- एक बार फरवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शिलॉन्ग में और फिर उसी साल 7 जून को कोलकाता में पेश हुए.

सीबीआई ने शीर्ष अदालत से कुमार के साथ हिरासत में पूछताछ की अनुमति मांगी और आरोप लगाया कि शिलॉन्ग में उनका रवैया ‘अहंकारी और असहयोगी’ था.

फरवरी 2019 में सीबीआई अधिकारियों ने पुलिस आयुक्त के आवास का घेराव कर लिया था, जिससे वहां तैनात पुलिस के साथ उनका टकराव हुआ था. पुलिस ने भी कोलकाता में सीबीआई के संयुक्त निदेशक पंकज श्रीवास्तव के आवास को घेर लिया था.

राजीव कुमार फिलहाल बंगाल में प्रमुख सचिव सूचना प्रौद्योगिकी के पद पर तैनात हैं, जबकि मामले की जांच अभी भी चल रही है.

अपनी ओर से सीएम ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार अपनी एजेंसियों और ‘बाहुबल’ के ज़रिए तृणमूल कांग्रेस को तंग कर रही है और अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर रही है.

ममता ने सितंबर 2021 में कहा था, ‘सत्ताधारी बीजेपी ने असेम्बली चुनावों के दौरान, केंद्रीय एजेंसियों और बाहुबल का इस्तेमाल करके तृणमूल कांग्रेस को बहुत तंग किया था. उप-चुनाव की तारीख़ घोषित होने के बाद बीजेपी अब फिर से, एजेंसियों का दुरुपयोग करके तृणमूल नेताओं और मंत्रियों को परेशान कर रही है. सिर्फ मुझे निशाना बनाने के लिए ईडी अभिषेक बनर्जी को तलब कर रही है. 9 घंटे तक पूछताछ करने के बाद उसे अगले दिन फिर बुला लिया जाता है, जिससे उनकी मंशा का पता चलता है’.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)


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