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Wednesday, 14 January, 2026
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न्यायालय ने विचाराधीन कैदी को 55 तारीखों पर अदालत में पेश न करने पर आपत्ति जताई, जांच के आदेश

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नयी दिल्ली, तीन दिसंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र पुलिस द्वारा 85 तारीखों में से 55 पर विचाराधीन कैदी को अदालत में पेश न करने के रवैये की निंदा करते हुए राज्य के जेल महानिदेशक को जांच का आदेश दिया और उनसे रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने हत्या के प्रयास के एक मामले में आरोपी शशि उर्फ ​​शाही चिकना विवेकानंद जुरमानी को जमानत दे दी, लेकिन इस तथ्य को गंभीरता से लिया कि मामले में मुकदमा चलने के बावजूद, उसे अदालत द्वारा दी गई 85 तारीखों में से 55 पर अदालत में पेश नहीं किया गया।

मामले में याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुईं वकील सना रईस खान ने दलील दी कि उनके मुवक्किल की भूमिका चाकू से वार करने की बताई गई है, जैसा कि मुखबिर द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी में बताया गया है। मुखबिर खुद को चश्मदीद गवाह बताता है। खान ने मंगलवार को पीठ को बताया कि मुकदमे की 85 तारीखों में से 55 पर पुलिस ने आरोपी को मामले की सुनवाई कर रही अदालत में पेश नहीं किया।

खान ने दलील दी कि आरोपी पिछले चार वर्षों से जेल में है और अभी तक आरोप तय नहीं हुए हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘हम सरकारी प्राधिकारियों के आचरण से स्तब्ध हैं। किसी आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश करना न केवल त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए है, बल्कि इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि यह एक सुरक्षा उपाय है, ताकि कैदी के साथ अन्यथा दुर्व्यवहार न हो और वह सीधे न्यायालय में आकर प्राधिकारियों के विरुद्ध अपनी शिकायतें, यदि कोई हो, बता सके।’’

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘हमारा मानना ​​है कि इस तरह के मूलभूत सुरक्षा उपाय का गंभीर उल्लंघन हुआ है, जो भयावह और चौंकाने वाला है। हम इसकी निंदा करते हैं।’’

पीठ ने जमानत याचिका खारिज करने संबंधी मुंबई उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपील का निपटारा करते हुए कहा, ‘‘याचिकाकर्ता को संबंधित अदालत द्वारा लगाए जाने वाली शर्तों के अधीन जमानत पर रिहा किया जाए।’’

शीर्ष अदालत ने महाराष्ट्र के जेल महानिदेशक की रिपोर्ट पर विचार करने के लिए मामले की सुनवाई अगले साल 3 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी।

भाषा सुभाष पवनेश

पवनेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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