नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने गूगल एलएलसी और कई मीडिया संस्थानों को उस कथित मानहानिकारक सामग्री को हटाने का आदेश दिया है, जो कारोबारी मनोज केसरीचंद संदेसरा और उनके परिवार को स्टर्लिंग बायोटेक बैंक धोखाधड़ी मामले से जोड़ती है।
वरिष्ठ न्यायाधीश-सह-किराया नियंत्रक ऋचा शर्मा एक दीवानी मुकदमे की सुनवाई कर रही थीं, जिसमें हर्जाने और ऑनलाइन सामग्री को हटाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। वादी ने दावा किया था कि यह सामग्री ‘‘झूठी, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक’’ है।
ऑनलाइन सामग्री में समाचार और वीडियो शामिल थे।
अदालत ने चार अप्रैल के अपने आदेश में कहा कि वादी एक अंतरिम एकपक्षीय राहत का हकदार हो गया है, जिसके तहत प्रतिवादी संख्या 1 से 3 (गूगल एलएलसी, मेटा प्लेटफॉर्म और जॉन डो), उनके प्रतिनिधि, कर्मचारी या उनकी ओर से कार्य करने वाले किसी भी व्यक्ति को स्टर्लिंग बायोटेक लिमिटेड एवं बैंक धोखाधड़ी मामले में वादी और उसके परिवार से संबंधित सामग्री को प्रकाशित करने, पुनः प्रकाशित करने या प्रसारित करने से रोका जाता है।
अदालत ने अपने आदेश का 36 घंटे के अंदर तत्काल अनुपालन करने का भी निर्देश दिया।
वादी ने एकपक्षीय अंतरिम निषेधाज्ञा का अनुरोध किया था, जिसके तहत प्रतिवादियों को स्टर्लिंग बायोटेक मामले के संबंध में वादी और उसके परिवार से जुड़ी ‘‘किसी भी और सामग्री को प्रकाशित करने, पुनः प्रकाशित करने या प्रसारित करने’’ पर रोक लगाने तथा सर्च इंजन और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से मौजूदा लिंक को हटाने की मांग की गई थी।
अदालत ने आदेश दिया कि मुकदमे के समन और निषेधाज्ञा अर्जी की सूचना प्रतिवादियों को तामील कराई जाए। मामले को 20 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध करते हुए, अदालत ने सभी पक्षों को निर्देश दिया कि वे एक सप्ताह के भीतर आवश्यक कदम उठाएं।
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