नयी दिल्ली, दो जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने केंद्र सरकार के 2016 में 500 और 1000 रुपये की श्रृंखला वाले नोटों को बंद करने के फैसले को सोमवार को 4:1 के बहुमत के साथ सही ठहराया।
इस मामले में अहम घटनाक्रम इस प्रकार रहे:
आठ नवंबर, 2016 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित किया और 500 रुपये और 1000 रुपये के उच्च मूल्य वाले नोटों को चलन से बाहर किए जाने की घोषणा की।
नौ नवंबर, 2016: सरकार के इस फैसले को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की गई।
16 दिसंबर, 2016: तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश टी. एस. ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने सरकार के फैसले की वैधता और अन्य सवालों को विचारार्थ पांच न्यायाधीशों की एक बड़ी पीठ के पास भेजा।
11 अगस्त, 2017: भारतीय रिजर्व बैंक के दस्तावेज के अनुसार नोटबंदी के दौरान 1.7 लाख करोड़ रुपये की असामान्य राशि जमा हुई। 23 जुलाई, 2017 : केंद्र ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि पिछले तीन वर्षों में आयकर विभाग द्वारा बड़े पैमाने पर की गई कार्रवाई से करीब 71,941 करोड़ रुपये की ‘अघोषित आय’ का पता चला।
25 अगस्त, 2017: रिजर्व बैंक(आरबीआई) ने 50 रुपये और 200 रुपये के नए नोट जारी किए।
28 सितंबर, 2022: उच्चतम न्यायालय ने इस संबंध में न्यायमूर्ति एस ए नज़ीर की अध्यक्षता में संविधान पीठ का गठन किया।
सात दिसंबर, 2022: उच्चतम न्यायालय ने नोटबंदी को चुनौती देने वाली विभिन्न याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रखा और केंद्र एवं आरबीआई को संबंधित दस्तावेज विचारार्थ रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया।
दो जनवरी 2023 : उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने नोटबंदी के फैसले को 4:1 के बहुमत के साथ सही ठहराया। पीठ ने कहा कि नोटबंदी की निर्णय प्रक्रिया दोषपूर्ण नहीं थी। पीठ ने कहा कि आर्थिक मामले में संयम बरतने की जरूरत होती है और अदालत सरकार के फैसले की न्यायिक समीक्षा करके उसके ज्ञान को प्रतिस्थापित नहीं कर सकती।
दो जनवरी 2023 : न्यायाधीश बी. वी. नागरत्ना ने बहुमत के फैसले से असहमति जताते हुए कहा कि 500 और 1000 रुपये की श्रृंखला वाले नोटों को बंद करने का फैसला गजट अधिसूचना के बजाए कानून के जरिए लिया जाना चाहिए था, क्योंकि इतने महत्वपूर्ण मामले से संसद को अलग नहीं रखा जा सकता।
भाषा
अविनाश दिलीप
दिलीप
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