गोरखपुर (उप्र): उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कहा कि पत्रकारिता के विभिन्न आयामों प्रिंट, विजुअल, डिजिटल व सोशल मीडिया के बीच परस्पर समन्वय होना आवश्यक है.
योगी आदित्यनाथ सोमवार को गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे.
उन्होंने कहा, ‘‘पत्रकारिता के विभिन्न आयामों प्रिंट, विजुअल, डिजिटल व सोशल मीडिया के बीच परस्पर समन्वय होना आवश्यक है. यदि किसी एक ही तथ्य को मीडिया के अलग-अलग आयाम भिन्न-भिन्न तरीके व दृष्टिकोण से प्रस्तुत करेंगे तो आम जन-मानस के सामने भ्रम की स्थिति उत्पन्न होगी.’’
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘ऐसी स्थिति मीडिया के प्रति जन-विश्वास को भी प्रभावित करेगी. इसलिए यह आवश्यक है कि मीडिया के सभी अंग समान मानक, मूल्यों व आदर्शों के अनुरूप आगे बढ़ें.’’
उन्होंने कहा कि “पत्रकारिता को आत्म-नियमन से मूल्यों व आदर्शों के साथ आगे बढ़ना है. भारत में 200 वर्ष की पत्रकारिता का मूलभाव राष्ट्र सेवा, समाज सेवा व ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का भाव रहा है. हमें इसी भाव के साथ आगे बढ़ना चाहिए.’’
पत्रकारिता समाज का आईना होती है।
आज गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह में सम्मिलित हुआ।
सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को हृदय से बधाई एवं उज्ज्वल कार्यकाल की मंगलमय शुभकामनाएं। pic.twitter.com/eda45AokdB
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) April 6, 2026
योगी ने कहा, ‘‘मीडिया में एक ऐसा भी वर्ग है, जो समाज को गुमराह करके अशांति फैलाने का कार्य करता है. हमें मीडिया के ऐसे रूप से बचने की आवश्यकता है.’’
उन्होंने कहा, ‘‘यदि सोशल मीडिया तथा प्रिंट मीडिया में एक ही खबर में भिन्नता होती है, तो वह जन-मानस को विचलित करती है. यह दुविधा की स्थिति खतरनाक होती है.’’
उन्होंने कहा कि हमें प्रयास करना चाहिए कि ऐसी स्थिति नहीं हो. सरकार मूल्यों व आदर्शों पर आधारित पत्रकारिता के साथ सदैव खड़ी है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र संवाद से चलता है. संवाद में आलोचना हो सकती है, किंतु इस आलोचना को व्यक्तिगत रंजिश नहीं मानना चाहिए. जब हम एक सूत्र की मनोस्थिति से कार्य करते हैं, तो सदैव सार्थक परिणाम सामने आते हैं.
उन्होंने कहा, ‘‘पत्रकारिता समाज का आईना होती है. पत्रकारिता जिस दृष्टि से समाज के मुद्दों को प्रस्तुत करती है, समाज उसी दृष्टि से उसे समझता है. पत्रकारिता को जन-विश्वास प्रतीक के रूप में बने रहने के लिए सही और गलत के प्रति एक भाव में रहना चाहिए. पत्रकारिता में किसी भी मुद्दे पर दो भाव नहीं होने चाहिए, क्योंकि तब यह जन-विश्वास पर कुठाराघात करता है.’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह वर्ष हिंदी पत्रकारिता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि 200 वर्ष पहले हिंदी पत्रकारिता की शुरूआत 30 मई 1826 को कोलकाता से हुई थी, जब जुगुल किशोर शुक्ल ने हिंदी के पहले समाचार पत्र उदंत मार्तण्ड की शुरुआत की थी.
योगी ने कहा कि समाज में विघटनकारी शक्तियों की चुनौती पत्रकारिता के सामने हमेशा रही है. ये शक्तियां पत्रकारिता की स्वतंत्रता को बाधित करती रही हैं. इन बाधाओं से विचलित हुए बिना हमें इसको बढ़ाए रखना है, क्योंकि हमारी पत्रकारिता उपनिषदों के मूल्यों पर आधारित है, जहां सत्य की निश्चित विजय का भाव समाहित है.
