मुंबई, 24 मार्च (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने एक लड़की की बलात्कार के बाद हत्या के मामले में मुत्युदंड पाये एक व्यक्ति की दोषसिद्धि को मंगलवार को यह कहते हुए रद्द कर दिया और नए सिरे से सुनवाई का आदेश दिया कि पिछली सुनवाई के दौरान उसकी पैरवी किसी वकील ने नहीं की थी।
न्यायमूर्ति सारंग कोटवाल और न्यायमूर्ति संदेश पाटिल की खंडपीठ ने कहा कि वैसे तो अपराध ‘भयानक और गंभीर’ था और सात वर्षीय बच्ची का परिवार अब भी इंसाफ की बाट जोह रहा है लेकिन आरोपी को भी ‘निष्पक्ष सुनवाई के उसके मौलिक अधिकार’ से वंचित नहीं किया जा सकता।
उच्च न्यायालय ने कहा कि आरोप तय होने से लेकर महत्वपूर्ण गवाहों की जिरह तक, आरोपी की ओर से कोई वकील पेश नहीं हुआ, उसे (जिसका नाम उजागर नहीं किया गया है क्योंकि वह पीड़ित का रिश्तेदार था) अपना बचाव करने का अवसर भी नहीं दिया गया जो उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन था।
खंडपीठ ने कहा कि नासिक की विशेष पोक्सो अधिनियम अदालत ने मामले की सुनवाई में अनावश्यक जल्दबाजी दिखाई।
उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘निस्संदेह, यह एक गंभीर मामला था और शीघ्र सुनवाई जरूरी थी, लेकिन निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांत की कीमत पर ऐसा नहीं किया जा सकता ।’’
इस मामले को अधीनस्थ अदालत में वापस भेजते हुए खंडपीठ ने कहा कि इस बार निचली अदालत को यह सुनिश्चित करने के लिए सभी सावधानियां बरतनी होंगी कि सुनवाई ऐसी हो जो आरोपी और अभियोजन पक्ष दोनों के लिए निष्पक्ष हो।
उच्च न्यायालय ने कहा कि मुकदमा दस महीने के भीतर समाप्त हो जाना चाहिए।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, अप्रैल 2017 में आरोपी ने लड़की को पास की एक दुकान पर जाकर उसके लिए तंबाकू और अपने लिए चॉकलेट खरीदने को कहा। जब लड़की तंबाकू देने उसके घर गई, तो उसने कथित तौर पर उसके साथ बलात्कार किया और फिर उसकी हत्या कर दी।
भाषा
राजकुमार नरेश
नरेश
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