नयी दिल्ली, 21 मार्च (भाषा) कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि वाणिज्य दूतावास प्रणाली एक स्थिरकारी शक्ति और एक सेतु दोनों के रूप में कार्य करती है, जिससे व्यापक राजनीतिक परिस्थितियों में अनिश्चितता के समय भी संबंधों को बनाए रखने में मदद मिलती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह चुपचाप, लेकिन महत्वपूर्ण रूप से वैश्विक संबंधों की मजबूती में योगदान देती है।
थरूर ने शुक्रवार शाम ‘कॉन्सुलर दिवस’ के उपलक्ष्य में यहां आयोजित एक कार्यक्रम में यह भी कहा कि वाणिज्य दूतावास कार्य कूटनीति का एक रूप है, ‘‘जिसे विज्ञप्तियों या घोषणाओं में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में आने वाले ठोस अंतर से मापा जाता है’’
इस कार्यक्रम का आयोजन ‘ऑनररी कॉन्सुलर कोर डिप्लोमैटिक – इंडिया’ द्वारा मानद वाणिज्य दूतावासों और गैर सरकारी संगठनों को वाणिज्य दूत गतिविधियों एवं द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने में उनके ‘‘उत्कृष्ट कार्य’’ के लिए पुरस्कार प्रदान करने के वास्ते किया गया।
विदेश मामलों पर संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष थरूर इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे, जिसमें कई देशों के राजदूतों ने भाग लिया।
तिरुवनंतपुरम से सांसद ने कहा, ‘‘भू-राजनीतिक तनाव से लेकर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट तक, यात्रा में व्यवधान से लेकर प्रवासन की जटिलताओं तक, वाणिज्य दूतावास प्रणालियों के समक्ष मांगों की संख्या, स्तर और संवेदनशीलता दोनों लिहाज से बढ़ी है।’’
थरूर की टिप्पणी पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और इस क्षेत्र के प्रभावित देशों से भारतीय नागरिकों के भारत में पलायन के बीच आई है, जिसमें वाणिज्य दूतावास सेवाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने कहा कि यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय संबंधों के एक ऐसे आयाम को दर्शाता है, जो एक ही समय में ‘‘गहराई से व्यावहारिक और गहराई से मानवीय’’ है।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि हालांकि कूटनीति का अधिकांश हिस्सा अक्सर उच्च राजनीति और सुर्खियां बटोरने वाली बातचीत से जुड़ा होता है, वहीं वाणिज्य दूतावास कार्य एक अलग स्तर पर संचालित होता है, जो लोगों की वास्तविकताओं के करीब होता है।
थरूर ने कहा कि मूल रूप से, वाणिज्य दूतावास कार्य राष्ट्रीय सीमाओं से परे, देश और व्यक्ति के बीच एक ‘इंटरफ़ेस’ के रूप में कार्य करता है, वह बिंदु जहां ‘‘एक राष्ट्र का अमूर्त विचार’’ विदेश में रहने वाले उसके नागरिकों के जीवन में एवं उससे जुड़ने की कोशिश करने वालों के अनुभवों में एक मूर्त उपस्थिति बन जाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘चाहे वीजा जारी करने के माध्यम से हो, संकट के क्षणों में सहायता प्रदान करने के माध्यम से हो, या सांस्कृतिक और वाणिज्यिक आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाने के माध्यम से हो, वाणिज्य दूतावास सेवाएं अंतरराष्ट्रीय सहयोग को दैनिक कार्यकलाप का अर्थ देती हैं।’’
थरूर ने कहा, ‘‘इसलिए यह कूटनीति का एक ऐसा रूप है जिसे विज्ञप्तियों या घोषणाओं में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में आने वाले ठोस बदलाव में मापा जाता है। अक्सर एक समय में एक मामला, एक व्यक्ति, एक क्षण।’’
विभिन्न देशों के वाणिज्य दूतावासों और मानद वाणिज्य दूतावासों द्वारा किए गए कार्यों को स्वीकार करते हुए, लोकसभा सदस्य ने इस बात पर जोर दिया कि वाणिज्य दूतावास का कार्य ‘‘वैश्विक संबंधों की मजबूती में चुपचाप, लेकिन महत्वपूर्ण रूप से योगदान देता है’’।
उन्होंने कहा, ‘‘देशों के बीच वाणिज्य दूतावास सहयोग का महत्व काफी बढ़ गया है। यात्रा को सुगम बनाना, सीमा पार के मुद्दों का समाधान करना या साझा चुनौतियों का प्रबंधन करना- ये सभी औपचारिक कूटनीति से परे समन्वय और आपसी समझ पर निर्भर करते हैं।’’
थरूर ने कहा, ‘‘इस संदर्भ में, वाणिज्य दूतावास कार्य एक स्थिरकारी शक्ति और एक सेतु दोनों के रूप में कार्य करता है, जो व्यापक राजनीतिक धाराओं के अनिश्चित होने के क्षणों में भी संबंधों को बनाए रखने में मदद करता है।’’
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नेत्रपाल दिलीप
दिलीप
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