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Thursday, 8 January, 2026
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कांग्रेस ने बिहार पर की समीक्षा बैठक, नतीजों को ‘चुनाव इंजीनियरिंग’ का परिणाम बताया

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नयी दिल्ली, 27 नवंबर (भाषा) कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को बिहार विधानसभा में अपने निर्वाचित विधायकों तथा हारे उम्मीदवारों के साथ चुनाव नतीजों को लेकर समीक्षा बैठक की और आरोप लगाया कि ऐसे नतीजे ‘चुनाव इंजीनियरिंग’ के चलते आए हैं।

बैठक के दौरान कई नेताओं ने यह भी कहा कि महागठबंधन में समय पर सीट बंटवारा नहीं होने, ‘आंतरिक कलह’, वोट चोरी और नीतीश कुमार सरकार द्वारा महिलाओं को 10-10 हजार रुपये दिया जाना करारी हार के मुख्य कारण रहे।

कांग्रेस मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ में हुई इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने नेताओं के साथ 10-10 के समूह में बातचीत की तथा उनसे हार के कारणों के बारे में जाना।

इस बैठक में कांग्रेस के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरू और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम भी थे।

बैठक के दौरान कांग्रेस के एक उम्मीदवार और सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के एक समर्थक नेता के बीच कहासुनी की भी खबर है, हालांकि कांग्रेस ने इससे इनकार किया है।

बैठक के बाद कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘ आज की चार घंटे की समीक्षा बैठक ने एक बात बिल्कुल स्पष्ट कर दी कि बिहार चुनाव एक वास्तविक जनादेश नहीं था, बल्कि एक बड़े पैमाने पर मैनेज किया गया और गढ़ा गया परिणाम था।’’

उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे एसआईआर ने लक्षित मतदाता विलोपन और संदिग्ध नाम को जोड़ने को संभव बनाया, कैसे योजना के तहत मतदान केंद्रों पर भी मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए खुलेआम नकद रिश्वत का इस्तेमाल किया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि ये मुद्दे संगठित चुनावी कदाचार और आदर्श आचार संहिता के खुलेआम उल्लंघन की ओर इशारा करते हैं, जो निर्वाचन आयोग की निगरानी में किए गए थे।

वेणुगोपाल का कहना है, ‘हार में जो हुआ वह लोकतंत्र पर सीधे हमले से कम नहीं है। कांग्रेस पार्टी इस चोरी हुए जनादेश को ‘न्यू नॉर्मल’ नहीं बनने देगी। भारत के लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ाई जारी है – निडरता से, निरंतर और लोगों के साथ।’

प्रदेश प्रभारी अल्लावारु ने कहा, ‘आज बिहार चुनाव परिणाम को लेकर सभी प्रत्याशियों और वरिष्ठ नेताओं के साथ गहन चर्चा हुई। जिसमें दो तरह के आकलन हुए। पहला आकलन वोट खरीद और चुनाव प्रक्रिया की धज्जियां उड़ाए जाने को लेकर हआ। दूसरा आकलन महागठबंधन और कांग्रेस पार्टी के प्रदर्शन और आंतरिक करणों पर हुआ।

टिकट बेचे जाने के आरोप को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि तथ्यों के आधार पर बात की जानी चाहिए।

कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी का कहना था कि जिनको विवादित टिकट कहा जा रहा है उन सीट पर हार का अंतर अन्य सीट की तुलना में कम है।

अल्लावरु ने कहा ने कहा कि ऐसा कैसे हो सकता है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सभी घटक दलों का स्ट्राइक रेट दो तिहाई से अधिक है जबकि महागठबंधन के घटक दलों का प्रदर्शन एक जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया यह ‘चनाव इंजीनियरिंग’ है।

बैठक के बाद अररिया से कांग्रेस के विधायक आबिदुर रहमान ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, ‘‘हार के कई कारण थे। पहला कारण है कि आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए 10-10 हजार रुपये दिए गए। गठबंधन सही समय पर नहीं हो सका। 10-11 सीट पर दोस्ताना मुकाबला हुआ, जिससे जनता में अलग संदेश गया।’’

उनका कहना था कि समय पर सीट बंटवारा नहीं होने से नुकसान हुआ।

रहमान ने असदुद्दीन ओवैसी और भाजपा का उल्लेख करते हुए दावा किया कि धार्मिक और जातीय उन्माद फैलाए जाने का असर हुआ।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के पुराने और नए नेताओं के बीच कलह थी।

पार्टी ने बिहार में 61 सीट पर चुनाव लड़ा था और केवल छह सीट ही जीत पाई। महागठबंधन भी 35 सीट पर सिमट गया।

वर्ष 2010 के बाद बिहार में पार्टी का यह दूसरा सबसे खराब प्रदर्शन था। उसने 2010 में केवल चार सीट जीती थीं।

भाषा हक संतोष

संतोष

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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