बिलासपुर, आठ जनवरी (भाषा) छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में बुधवार को एक राष्ट्रीय परिसंवाद के दौरान कुलपति ने कथित तौर पर नागपुर से आमंत्रित एक साहित्यकार को बाहर जाने के लिए कह दिया, जिसके बाद साहित्यकारों ने इस पर नाराजगी जताई है।
‘समकालीन हिंदी कहानी : बदलते जीवन सन्दर्भ’ नामक विषय पर साहित्य अकादमी और केंद्रीय विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से यह राष्ट्रीय परिसंवाद आयोजित किया गया था। परिसंवाद के दौरान देश के प्रसिद्ध साहित्यकार, कथाकार, कवि और लेखक आदि मौजूद थे।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के अनुसार बुधवार को राष्ट्रीय परिसंवाद की शुरुआती औपचारिकताओं के बाद कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति आलोक कुमार चक्रवाल ने अपने संबोधन के दौरान ही मंच के सामने की प्रथम पंक्ति में बैठे नागपुर से आमंत्रित कथाकार मनोज रूपड़ा से पूछा- ”भाई साहब, आप बोर तो नहीं हो रहे हैं” इसके जवाब में रूपड़ा ने कहा, ”आप विषय पर बात करिए”
वायरल वीडियो के अनुसार इतना सुनते ही कुलपति नाराज हो गए और कहा, ”वैसे तो मैं बिना मुद्दे की कोई बात करता ही नहीं हूं, लेकिन कुलपति से कैसे बात करते हैं, इसका विवेक आपको नहीं है, सीख लीजिएगा।”
फिर कुलपति ने कहा, ”आपको यहां बुलाया किसने है।”
वीडियो में देखा जा सकता है कि कुलपति फिर भी नहीं रुके और उन्होंने स्पष्ट शब्दों में रूपड़ा को कार्यक्रम से निकल जाने को कह दिया। साथ ही यह भी कहा कि इन्हें दोबारा न बुलाएं। इसके बाद कथाकार मनोज रूपड़ा बिना देरी किये, तत्काल सभा कक्ष से बाहर निकल गए।
वहीं कुछ अन्य साहित्यकार भी वहां से निकल गए।
इस संबंध में जब बृहस्पतिवार को कुलपति चक्रवाल से फोन पर बात की गई तब उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा, ”मैंने देखा कि मनोज रूपड़ा कार्यक्रम के दौरान असहज लग रहे थे। कार्यक्रम में वह रूचि नहीं ले रहे थे। इसलिए मैंने उन्हें सहज ढंग से ऐसा कह दिया।”
उन्होंने कहा कि वे इसे और ज्यादा तूल नहीं देना चाहते और मामले का पटाक्षेप चाहते हैं।
वहीं एक वीडियो संदेश में कथाकार रूपड़ा ने कहा, ”कल बिलासपुर के गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में मेरे साथ जो अपमानजनक घटना हुई, उसके लिए मैं क्या कहूं। मैंने अभी तक इसके प्रतिवाद में भी कोई बात नहीं की है। और मैं करूंगा भी नहीं। क्योंकि यह मेरा व्यक्तिगत अपमान नहीं है, यह पूरी लेखक बिरादरी का अपमान है। उस विश्वविद्यालय के कुलपति के उस आचरण के विरोध में जिस तरह की भी बातें चल रही है, वह लेखक बिरादरी का प्रतिरोध है। मुझे व्यक्तिगत रूप से इस पर कोई टिप्पणी नहीं करनी है।”
भाषा
सं, संजीव रवि कांत
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