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Thursday, 2 April, 2026
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छत्तीसगढ़: कोरिया जिले के किसानों ने जल पुनर्भरण प्रणाली के लिए 5 प्रतिशत भूमि अलग रखी

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नयी दिल्ली, पांच मार्च (भाषा) छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में सामुदायिक नेतृत्व वाली जल संरक्षण पहल के तहत किसान स्वेच्छा से अपनी कृषि भूमि का पांच प्रतिशत हिस्सा छोटे पुनर्भरण तालाबों और सीढ़ीदार गड्ढों के निर्माण के लिए अलग रखते हैं।

बृहस्पतिवार को एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि सामूहिक श्रमदान से 440 से अधिक पारंपरिक तालाबों का पुनरुद्धार हुआ और वे प्राकृतिक जल पुनर्भरण के स्रोत बन गए।

‘आवा पानी झोकी’ आंदोलन के कारण मिट्टी का कटाव कम हुआ है, सूखे के दौरान फसलों में नमी का स्तर बढ़ा है और भूजल का पुनर्भरण स्थिर हो गया है। यह पहल केंद्र सरकार के जल संरक्षण अभियान ‘जल संचय जन भागीदारी’ का हिस्सा है।

बयान के अनुसार इस आंदोलन को व्यापक सामुदायिक भागीदारी से मजबूती मिली है। महिलाएं ‘नीर नायिका’ बनकर उभरीं हैं, जो घरों का मार्गदर्शन करती हैं और जल संरक्षण के लिए गड्ढे बनवाने में अग्रणी भूमिका निभाती हैं। साथ ही वे पारंपरिक लोकगीतों के माध्यम से जागरूकता फैलाती हैं।

बयान के अनुसार ‘जल दूत’ के नाम से जाने जाने वाले युवा स्वयंसेवक नालियों का मानचित्रण करके, नहरों से गाद निकालकर, नुक्कड़ नाटक के आयोजन और भित्ति चित्रों के माध्‍यम से जल संरक्षण को बढ़ावा देते हैं और इस आंदोलन को ऊर्जा प्रदान करते हैं।

बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के 500 से अधिक लाभार्थियों ने भी अपने घरों के पास जल संरक्षण के गड्ढे बनवाये, जिससे जल संरक्षण एक सरकारी पहल से एक साझा सामुदायिक जिम्मेदारी में बदल गया।

यह पहल ग्राम सभा के प्रस्तावों के माध्यम से लागू की गई।

बयान में कहा गया है कि 1,260 से अधिक किसानों ने अपनी कृषि भूमि का 5 प्रतिशत हिस्सा जल पुनर्भरण तालाब बनाने के लिए रखा और जिले भर में 2,000 से अधिक जलभंडार गड्ढे बनाए गए। बयान में कहा गया है कि एक उदाहरण में, समुदायों ने तीन घंटे के भीतर 660 जलभंडार गड्ढे बनाए।

बयान में कहा गया है कि कई गांवों में भूजल स्तर 3-4 मीटर तक बढ़ गया है, 17 दूरस्थ आदिवासी बस्तियों में झरने पुनर्जीवित हो गए हैं और बेहतर मृदा नमी प्रतिधारण के कारण कृषि उत्पादकता में सुधार हुआ है। इसमें यह भी कहा गया है कि आजीविका स्थिर होने से मौसमी पलायन में अनुमानित 25 प्रतिशत की कमी आई है।

बयान में कहा गया है कि जिला प्रशासन ने सूक्ष्म जलविभाजक मानचित्रण, जलभूवैज्ञानिक आकलन और तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से इस पहल का समर्थन किया। बयान में कहा गया है कि इससे यह सुनिश्चित हुआ कि प्रत्येक संरचना को अधिकतम जल पुनर्भरण दक्षता के लिए रणनीतिक रूप से स्थापित किया गया था।

बयान में कोरिया के जिला कलेक्टर के हवाले से कहा गया है, ‘‘यह पहल केवल ढांचों तक सीमित नहीं है। यह हमारे किसानों के भविष्य को सुरक्षित करने, पलायन को कम करने और हर गांव में भरोसेमंद जल उपलब्धता सुनिश्चित करने से जुड़ी है। कोरिया जिला इस गति को बनाए रखते हुए सतत विकास के नए मानक स्थापित करेगा।’’

भाषा अमित नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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