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Friday, 20 March, 2026
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छत्तीसगढ़ विस: कांग्रेस का केंद्र पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप, कार्यवाही का बहिष्कार किया

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रायपुर, 17 मार्च (भाषा) छत्तीसगढ़ के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मंगलवार को विधानसभा में आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह ‘विकसित भारत – रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ (वीबी जी -राम -जी) लाकर गरीबों के अधिकार छीनने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि 2005 में लागू किया गया मनरेगा दुनिया के सबसे बड़े रोज़गार पैदा करने वाले कार्यक्रमों में से एक है, जिसके तहत राज्य में लाखों मज़दूरों का पंजीकरण किया गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भले ही इस योजना का नाम बदलना एक पहलू हो, लेकिन केंद्र ने इसकी मूल संरचना और इसके तहत गारंटीकृत अधिकारों को ही पूरी तरह से बदल दिया है। बघेल ने दावा किया कि पहले मजदूरी का सौ प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार वहन करती थी, लेकिन अब इस व्यवस्था में बदलाव कर दिया गया है।

उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि निर्माण-संबंधी कार्यों के लिए पहले जो 90:10 का वित्तपोषण अनुपात था, उसे अब सभी घटकों के लिए बदलकर 60:40 कर दिया गया है।

कांग्रेस ने स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि विपक्ष ने सोमवार को ही सदन को सूचित कर दिया था कि वे मंगलवार को इस मामले पर होने वाली कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेंगे। उन्होंने विपक्ष पर पहले से तय मुद्दे को उठाने और विधानसभा का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने आज अपने ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ अभियान के तहत विधानसभा का घेराव करने की भी योजना बनाई है।

नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने कहा कि उन्होंने पहले ही संकेत दे दिया था कि कांग्रेस मनरेगा पर स्थगन प्रस्ताव लाएगी।

बघेल ने कहा कि यदि प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है, तो बहिष्कार की कोई आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने सत्ता पक्ष को चर्चा की अनुमति देने की चुनौती दी।

बाद में जब दोनों पक्षों ने नारेबाजी शुरू कर दी तब सभापति धर्मलाल कौशिक ने सदन की कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित कर दी।

सदन की कार्यवाही फिर से शुरू होने पर महंत ने कहा कि यह मुद्दा छत्तीसगढ़ के गरीबों से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि पार्टी उनके कल्याण के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

उन्होंने चर्चा की मांग दोहराते हुए पूछा, ‘अगर गरीबों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा नहीं होगी, तो फिर किस पर होगी?’

कांग्रेस के वरिष्ठ विधायकों कवासी लखमा और उमेश पटेल ने भी इस मांग का समर्थन किया।

सभापति कौशिक ने कहा कि यह विषय केंद्र सरकार से संबंधित है और उन्होंने स्थगन प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया। इसके बाद कांग्रेस सदस्यों ने कार्यवाही का बहिष्कार किया और सदन से उठकर चले गए।

भाषा संजीव अमित

अमित

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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