Wednesday, 25 May, 2022
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याचिका में आरोप, गुजरात के अस्पताल में आग अदालती आदेशों का पालन न करने के कारण लगी, हाई कोर्ट सुनवाई करेगा

वकील अमित मणिभाई पंचाल ने गुजरात हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए दावा किया है कि अस्पताल के लिए अग्निशमन विभाग से एनओसी लेना अनिवार्य होने संबंधी पूर्व के अदालती आदेशों का अनुपालन नहीं किया गया था, जिसकी वजह से ही आग लगने की घटना हुई.

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नई दिल्ली: गुजरात हाई कोर्ट राज्य में अस्पताल में लगी आग के मामले में दायर एक याचिका पर सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि ऐसे अग्निकांडों पर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की तरफ से जारी निर्देशों का पालन नहीं किया गया है.

अदालत की ओर रुख करने वाले एक वकील अमित मणिभाई पंचाल ने दावा किया कि हाईकोर्ट की तरफ से पारित आदेशों के बावजूद ‘यहां प्रतिवादियों की तरफ से इसका पूरी तरह अनुपालन नहीं किया गया जिसकी वजह से ही गुजरात राज्य में आग लगने की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हुईं और मानव जीवन और संपत्ति को नुकसान पहुंचा.’

उन्होंने गुजरात में अगस्त 2020 से इस साल मई के बीच हुई सात ऐसी घटनाओं का हवाला दिया जो अहमदाबाद, जामनगर, वडोदरा, राजकोट, सूरत और भरूच में हुई थीं.

अपनी याचिका में पंचाल ने विशेष रूप से उस अग्निकांड का जिक्र किया जो 1 मई को भरूच के पटेल वेलफेयर अस्पताल में हुआ था, जिसमें दो नर्स और 16 कोविड मरीजों समेत 18 लोग मारे गए.

उन्होंने आरोप लगाया कि इस अस्पताल के पास कोविड मरीजों को भर्ती करने के लिए जिले के अग्निशमन विभाग की तरफ से जारी होने वाला वैध अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं था.

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वकील ने आगे कहा कि अस्पताल में आग की यह घटना ‘बुरी तरह व्यथित कर देने वाली है और इससे मृतकों के परिजन एकदम टूट चुके हैं. कोविड-19 महामारी बढ़ने के बीच इस घटना ने भरूच जिले में दहशत का माहौल बना दिया है.’

पंचाल ने ऐसी घटनाओं के संबंध में हाई कोर्ट के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट की तरफ से पारित आदेशों का भी हवाला दिया और दावा किया कि अस्पताल के लिए अग्निशमन विभाग से एनओसी लेना अनिवार्य होने संबंधी पूर्व के अदालती आदेशों का अनुपालन नहीं किया गया था, जिसकी वजह से ही आग लगने की घटना हुई.

चीफ जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिव भार्गव करिया की पीठ ने राज्य सरकार के साथ याचिका में उल्लिखित अन्य अधिकारियों को भी नोटिस जारी किया. उन्हें 10 मई तक अपना जवाब दाखिल करना है और 11 मई को याचिका पर सुनवाई होगी.


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‘जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करें’

पंचाल ने अन्य बातों के अलावा अदालत से यह आग्रह भी किया कि उसे भरूच अग्निकांड पर रिपोर्ट तलब करनी चाहिए और गुजरात के राजकोट अस्पताल में आग लगने की घटना की जांच रिपोर्ट भी सार्वजनिक की जानी चाहिए, जिसमें पांच कोविड मरीजों की जलकर मौत हो गई थी.

राज्य सरकार ने राजकोट की घटना की जांच के लिए गुजरात हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज डी.ए. मेहता की अगुआई में एक जांच आयोग पिछले साल नवंबर में गठित किया था.

बाद में इसी आयोग को अहमदाबाद के एक अन्य अस्पताल में आग लगने की घटना की जांच करने का जिम्मा सौंपा गया था. आयोग ने इसी वर्ष मार्च में अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को सौंपी है.

अब पंचाल ने यह मांग की है कि इस रिपोर्ट को अदालत में पेश किया जाए, साथ ही इसे सार्वजनिक किया जाए और इसके मुताबिक अधिकारियों को उचित दिशानिर्देश जारी किए जाएं.


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सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से फायर ऑडिट पैनल बनाने को कहा था

पंचाल ने अपनी याचिका में राजकोट अग्निकांड पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट की तरफ से पिछले साल 18 दिसंबर को जारी एक आदेश का भी जिक्र किया.

शीर्ष अदालत ने पिछले साल 18 दिसंबर को सभी राज्यों को निर्देश दिया था कि वे कोविड-19 अस्पतालों का महीने में कम से कम एक बार फायर ऑडिट कराने के लिए हर जिले में एक समिति का गठन करें, इसमें कोई भी कमी मिलने पर चिकित्सा प्रतिष्ठान के प्रबंधन को सूचित करें और आगे की कार्रवाई के लिए सरकार को रिपोर्ट सौंपें.

जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी और जस्टिस एम.आर. शाह की खंडपीठ ने तब तक संबंधित अग्निशमन विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र न लेने वाले कोविड-19 अस्पतालों को आदेश दिया था कि तुरंत इसके लिए आवेदन करें.

कोर्ट ने कहा था, ‘जिन कोविड अस्पतालों ने अपनी एनओसी को रिन्यू नहीं कराया, उन्हें तुरंत इसके लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए, ताकि इसके बाद उचित ढंग से निरीक्षण हो सके और निर्णय लिया जा सके. कोविड अस्पतालों की तरफ ले एनओसी नहीं लेने या इन्हें रिन्यू न कराए जाने की जानकारी मिलने पर राज्य की तरफ से उचित कार्रवाई की जाएगी.’

इसी तरह, गुजरात हाई कोर्ट ने भी पिछले साल 15 दिसंबर को कुल 14 निर्देश जारी किए थे.

इसमें अधिकारियों को दिया गया यह निर्देश भी शामिल था कि वे राज्य में कोविड अस्पतालों और हेल्थकेयर सेंटर समेत ऐसे सभी अस्पतालों का ब्योरा कोर्ट को उपलब्ध कराएं जिन्होंने आग से बचाव और ऐसी घटनाएं रोकने के बाबत वैध एनओसी नहीं ले रखा है.

हाई कोर्ट ने अस्पतालों की गहन चिकित्सा इकाइयों (आईसीयू) के लिए विशिष्ट निर्देश भी जारी किए थे, जिसमें कहा गया था कि इनमें पर्दे, बेडशीट, छत आदि में इस्तेमाल होने वाली सामग्री अग्निरोधी होनी चाहिए.

अन्य आदेशों के अलावा इसने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को भी कहा था कि आईसीयू में बिजली के प्वाइंट और एयर कंडीश्नर की महीने में एक बार सर्विसिंग होनी चाहिए, पूरे आईसीयू में स्प्रिंकलर सिस्टम होना चाहिए, वेंटिलेटर और फिल्टर भूतल पर लगे होने चाहिए और जहां तक संभव हो आईसीयू को केवल भूतल पर ही होना चाहिए.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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