नयी दिल्ली, 26 अगस्त (भाषा) केंद्र सरकार ने जन शिकायत निवारण की समय सीमा मौजूदा 30 दिन से घटाकर 21 दिन कर दिया है।
संशोधित दिशा-निर्देशों से जुड़े आदेश में शिकायतों के निपटारे के लिए समर्पित अधिकारियों की नियुक्ति का सुझाव दिया गया है, साथ ही ‘सरकार के समग्र दृष्टिकोण’ पर भी जोर दिया गया है।
प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) द्वारा जारी आदेश में कहा गया है, ‘‘इसका अर्थ यह है कि शिकायत को किसी भी मामले में यह कहकर बंद किया जाएगा कि ‘इस मंत्रालय/विभाग/कार्यालय से संबंधित नहीं है’ या इस तरह की अन्य भाषा के आधार पर इसे नहीं बंद किया जाएगा। यदि शिकायत का विषय प्राप्त करने वाले मंत्रालय से संबंधित नहीं है, तो इसे सही प्राधिकारी को हस्तांतरित करने का प्रयास किया जाएगा।’’
इसमें कहा गया कि जिन मंत्रालयों/विभागों में बड़ी संख्या में जन शिकायतें प्राप्त होती हैं, वहां स्वतंत्र प्रभार के साथ पर्याप्त पद पर एक समर्पित नोडल अधिकारी नियुक्त करने की सलाह दी जाती है, ताकि जन शिकायतों का समय पर और गुणवत्तापूर्ण निपटान सुनिश्चित किया जा सके।
संशोधित दिशा-निर्देशों का उल्लेख करने वाला यह आदेश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 29 जून को भारत सरकार के सचिवों के साथ बातचीत के दौरान दिए गए निर्देशों के बाद जारी किया गया।
निर्देशों के अनुपालन में, प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग ने केन्द्रीयकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) को ‘‘नागरिकों के लिए अधिक संवेदनशील, सुलभ और सार्थक’’ बनाने के लिए मौजूदा प्रक्रियाओं की समीक्षा की। यह एक ऑनलाइन पोर्टल है, जो लोगों को सरकारी विभागों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने की सुविधा देता है।
विभाग द्वारा 23 अगस्त, 2024 जारी आदेश में कहा गया, ‘‘सीपीजीआरएएमएस में शुरू किए गए 10 चरणों के सुधारों ने औसत समाधान समय को काफी कम कर दिया है। इसे ध्यान में रखते हुए, सीपीजीआरएएमएस में मामलों के लिए डीएआरपीजी द्वारा सुझाए गए अधिकतम निवारण समय को और घटाकर 21 दिन कर दिया गया है।’’
आदेश में कहा गया कि जिन मामलों में निवारण में अधिक समय लगता है, वहां कारण बताते हुए अंतरिम उत्तर दिया जा सकता है तथा शिकायत के समाधान की अपेक्षित समयसीमा भी बताई जा सकती है।
भाषा धीरज माधव संतोष
संतोष
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