नयी दिल्ली, 31 मार्च (भाषा) भारत के कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) में प्रस्तावित संशोधनों पर ‘गंभीर चिंता’ जताई है और व्यापक परामर्श व ‘नागरिक संस्थाओं पर अत्यधिक सरकारी नियंत्रण’ के खिलाफ सुरक्षा उपायों की मांग की।
संगठन ने 31 मार्च को शाह और सांसदों को लिखे गए एक जैसे पत्रों में कहा कि एफसीआरए विधेयक, 2026, हालांकि निगरानी को मजबूत करने के उद्देश्य से लाया गया है, लेकिन यह ‘संवैधानिक संतुलन, नागरिक समाज की स्वतंत्रता और भारत में परमार्थ सेवाओं के भविष्य’ को बिगाड़ सकता है।
संगठन ने उन प्रावधानों पर विशेष चिंता जताई, जो विदेशी अंशदान और ऐसे कोषों से निर्मित संपत्तियों को न केवल एफसीआरए पंजीकरण रद्द होने या ‘सरेंडर’ के मामलों में, बल्कि लाइसेंस के नवीनीकरण न होने सहित ‘परिसमाप्ति मान लेने’ (डीम्ड सेसेशन) के मामलों में भी एक नामित प्राधिकरण के पास सौंपने की अनुमति देंगे।
पत्र में चेतावनी दी गई कि इस विस्तार से उन संगठनों पर असमान रूप से प्रभाव पड़ सकता है, जिनके नवीनीकरण को अस्वीकार कर दिया गया है, खासकर इसलिए क्योंकि नवीनीकरण प्रक्रिया पूरी तरह से गृह मंत्रालय के नियंत्रण में है।
पत्र के मुताबिक, विभाग द्वारा पाई गई कमियों की जानकारी संगठन को नहीं दी जाती और संगठनों को उन कमियों के संबंध में अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया जाता है, जिनके आधार पर नवीनीकरण को अस्वीकार या नामंजूर किया जाता है।
संगठन ने संवैधानिक मुद्दों को उठाते हुए कहा कि प्रस्तावित ढांचा संपत्ति के अधिकार से संबंधित अनुच्छेद 300ए के तहत चिंताएं उत्पन्न करता है।
संगठन ने इस ओर इशारा किया कि ‘संपत्तियों को सौंपने से पहले किसी न्यायिक निर्णय का अभाव’ है, जो कि उचित प्रक्रिया और आनुपातिकता के सिद्धांत से भटकाव है।
संगठन ने सांसदों और गृह मंत्री से अपनी अपील में आग्रह किया कि विधेयक को व्यापक परामर्श के लिए संसदीय स्थायी समिति को भेजा जाए और ‘प्रशासनिक चूक के कारण संपत्ति जब्ती जैसे अनुचित दंड न दिए जाने जैसे सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग की।
भाषा जितेंद्र दिलीप
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