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Saturday, 15 June, 2024
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व्यापारियों के महासंघ ने कहा, अमेज़न और फ्लिपकार्ट के खिलाफ कार्रवाई करे सरकार

कन्फेडरेशन ऑफ इंडिया ट्रेडर्स (कैट) का यह कहना है कि ई-कॉमर्स कंपनियां एफडीआई नीति 2018 का उल्लंघन कर रहीं हैं.

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नई दिल्ली : व्यापारियों के संगठन कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने ई-कॉमर्स कंपनियों की त्यौहारी सीजन की सेल (फेस्टिवल सेल) पर दी जाने वाली छूट का विरोध किया है. कैट ने ऐतराज जताते हुए कहा कि इस पर तत्काल रोक लगाने की जरूरत है. उसने अमेज़न और फ्लिपकार्ट की सेल के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है. कैट का यह भी कहना है कि ई-कॉमर्स कंपनियां एफडीआई नीति 2018 का उल्लंघन कर रही हैं. इन पर नकेल कसने की जरूरत है.

कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने इसका विरोध करने के लिए मंगलवार को कांस्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया. आपको बता दें कैट देश में 40 हजार व्यापारिक संगठनों के माध्यम से 7 करोड़ व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करता है.

प्रवीण खंडेलवाल ने दिप्रिंट से बातचीत में कहा कि कैट ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री से ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा सरकार की एफडीआई नीति के घोर उल्लंघन पर तुरंत गौर करने और घोषित फेस्टिव सेल पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया है.

कैट ने सरकार से इन कंपनियों के बिजनेस मॉडल की जांच करने का भी आग्रह किया है. दिप्रिंट को खंडेलवाल ने बताया कि उनका विरोध कंपनियों के रवैये से है. किसी भी वस्तु को उसके मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट से कम दाम में कैसे बेचा जा रहा है.

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि वे विक्रेताओं को उनके संबंधित प्लेटफॉर्म पर कीमतें तय करने और अपनी पसंद की पेशकश करने का अधिकार देते हैं. जिसके अनुसार उनके पोर्टल पर पंजीकृत व्यापारी अपने ग्राहकों को अपने अनुसार कीमतों में छूट प्रदान करते हैं, जिसमें उनकी कोई भूमिका नहीं होती.

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प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि ये कंपनियां सरकार की एफडीआई नीति का घोर उल्लंघन कर रही हैं. जिसमें ई-कॉमर्स कंपनियों की भूमिका को अच्छी तरह से परिभाषित किया है और इसमें कोई अस्पष्टता नहीं है. एफडीआई नीति के प्रमुख प्रावधानों के अनुसार ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस मॉडल में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है और जिसके तहत ई-कॉमर्स कंपनियां तकनीकी प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य कर सकती हैं.

ई-कॉमर्स कंपनियां केवल बिजनेस टू बिजनेस (बी 2 बी) में संलग्न होंगी और बिजनेस टू कंज्यूमर्स (बी 2 सी) की गतिविधियां अपने प्लेटफॉर्म पर बिलकुल नहीं कर सकेंगी. इसके अलावा, नीति स्पष्ट रूप से कहती है कि ई-कॉमर्स इकाइयां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कीमतों को प्रभावित नहीं करेंगी और बाज़ार में प्रतिस्पर्धा के स्तर को बनाए रखेंगी.

खंडेलवाल ने कहा कि देश के व्यापारी किसी भी प्रतिस्पर्धा से डरते नहीं हैं और ई कॉमर्स का विरोध नहीं करते हैं, लेकिन इसके लिए समान स्तर की प्रतिस्पर्धा का होना जरूरी है जिसमें कोई अस्वस्थ पद्धति न हो.

उन्होंने कहा कि एफडीआई को निजी इक्विटी या वेंचर कैपिटलिस्ट द्वारा बिना किसी ब्याज के उपलब्ध कराया जाता है क्योंकि पीई या वीसी को उस समय में कम्पनी से बाहर निकलना है जब कंपनी का मूल्यांकन उनके निवेश से कहीं अधिक होता है.

ई-कॉमर्स एक्सपर्ट परेश पारेख ने दिप्रिंट से बातचीत में कहा कि आज के समय में किसी भी वस्तु की ऑनलाइन खरीदारी में केवल पैसा नहीं बल्कि सुविधा महत्वपूर्ण है. लोग आज के दौर में ऑनलाइन खरीदना पसंद कर रहे हैं. नए-नए स्टार्टअप बिज़नेस मॉडल को प्रभावित करते हैं. पहले वो वस्तुओं को कम दाम में बेचते हैं और लोगों को प्रलोभन देते हैं. जिससे लोग उन पर विश्वास कर सामान खरीदते हैं फर्नीचर, टूथपेस्ट तमाम सेक्टर के स्टार्टअप ऐसा कर रहे हैं क्योंकि वो अपना मार्किट बनाना चाहते हैं. डिस्ट्रीब्यूटर भी अपना नुक़सान कर सामान बेचते हैं. केवल फ्लिपकार्ट और अमेज़न ही नहीं सब नए स्टार्टअप ऐसा कर रहे हैं यह ट्रेंड जारी रहने वाला है. अब रिवर्स नहीं होने वाला हैं. यह आम व्यापारियों के बिज़नेस मॉडल को प्रभावित करेंगे और सबको पता था कि ऐसा होने वाला था.

क्या होता है ई-कॉमर्स

इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स (ई-कॉमर्स) इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क पर व्यापार करने का एक तरीका होता है. ई-कॉमर्स उपभोक्ताओं को समय या दूरी के बिना किसी बाधा के साथ वस्तुओं और सेवाओं के इलेक्ट्रॉनिक रूप से आदान-प्रदान करने की अनुमति देता है. ई-कॉमर्स के तहत वस्तुओं या सेवाओं को खरीद या बिक्री के लिए इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का प्रयोग होता है.

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