नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा में उस समय तीखी बहस देखने को मिली, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा से जुड़े एक मैगजीन लेख का हवाला देने की कोशिश की.
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान राहुल गांधी के भाषण में उस वक्त बाधा आई, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सांसद एक ऐसी किताब का हवाला नहीं दे सकते, जो अभी प्रकाशित नहीं हुई है और जिसकी पुष्टि नहीं हुई है.
अपने भाषण की शुरुआत में राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सांसद तेजस्वी सूर्या द्वारा कांग्रेस पर लगाए गए आरोप का ज़िक्र किया, जिसमें देशभक्ति और राष्ट्रीय संस्कृति से जुड़े सवाल उठाए गए थे. इसके जवाब में राहुल गांधी ने कहा कि वह जनरल नरवणे की आत्मकथा से एक हिस्सा पढ़ना चाहते हैं.
राहुल गांधी ने कहा, “वहां एक युवा साथी ने कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाया. मैं इस मुद्दे को उठाने वाला नहीं था, लेकिन जब हमारी देशभक्ति और भारतीय संस्कृति की समझ पर सवाल उठाए गए हैं, तो मैं कुछ पढ़ना चाहता हूं. यह सेना प्रमुख जनरल नरवणे की आत्मकथा से है. आप ध्यान से सुनिए, आपको समझ आ जाएगा कि कौन देशभक्त है और कौन नहीं.”
राहुल गांधी ने आगे कहा कि यह अंश डोकलाम की एक घटना से जुड़ा है, जब “चार चीनी टैंक भारतीय सीमा में घुस रहे थे” और एक पहाड़ी पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने कहा कि वह एक ऐसे लेख से उद्धरण दे रहे हैं, जिसमें जनरल नरवणे की किताब का ज़िक्र है.
इस पर एनडीए सांसदों ने कड़ा विरोध जताया और कहा कि जनरल नरवणे की आत्मकथा अभी प्रकाशित नहीं हुई है, इसलिए उसे सदन में नहीं पढ़ा जा सकता.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी से साफ तौर पर पूछा कि जिस किताब का वह हवाला दे रहे हैं, क्या वह औपचारिक रूप से प्रकाशित हो चुकी है.
उन्होंने कहा, “मैं चाहता हूं कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष वह किताब सदन के सामने पेश करें, जिससे वह उद्धरण दे रहे हैं, क्योंकि वह किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है.”
इसके जवाब में राहुल गांधी ने कहा कि उनका स्रोत प्रामाणिक है और यह उद्धरण एक प्रकाशित मैगजीन लेख में छपा है, जिसमें पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा का जिक्र किया गया है. जनरल नरवणे दिसंबर 2019 से अप्रैल 2022 तक थल सेना प्रमुख रहे थे.
हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अप्रकाशित सामग्री को सदन में पढ़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती. उन्होंने राहुल गांधी को आगे पढ़ने की इज़ाज़त नहीं दी. इस पर विपक्षी सांसदों ने बार-बार मांग की कि राहुल गांधी को बोलने दिया जाए, जबकि सत्ता पक्ष का कहना था कि सदन के नियम अप्रकाशित सामग्री का हवाला देने की अनुमति नहीं देते.
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, “स्पीकर ने साफ आदेश दिया है कि मैगजीन या अखबारों में छपे लेखों को सदन में नहीं पढ़ा जा सकता. सदन में बहस कानून और नियमों के अनुसार ही होनी चाहिए.”
रिजिजू ने यह भी कहा, “यह भी चर्चा होनी चाहिए कि लोकसभा में स्पीकर के आदेश का पालन न करने वाले सदस्य के साथ क्या किया जाए” क्योंकि राहुल गांधी लगातार चीन से जुड़े मुद्दे पर बोलने और मैगजीन लेख से उद्धरण देने की कोशिश कर रहे थे.
करीब 30 मिनट तक दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बना रहा और सदन में हंगामा चलता रहा. सत्ता पक्ष का कहना था कि विपक्ष अप्रकाशित लेख या किताब का हवाला नहीं दे सकता.
बाद में नेता प्रतिपक्ष के समर्थन में समाजवादी पार्टी प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने कहा, “चीन से जुड़ा मामला बहुत संवेदनशील है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को बोलने दिया जाना चाहिए.”
इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी हस्तक्षेप किया. लगातार शोर-शराबे और रुकावटों के बीच आखिरकार सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाई गई.
सदन में इस चर्चा के लिए कुल 18 घंटे का समय तय किया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 फरवरी (बुधवार) को जवाब देंगे, जबकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के 11 फरवरी को जवाब देने की उम्मीद है.
बजट सत्र कुल 65 दिनों में 30 बैठकों के साथ चलेगा और 2 अप्रैल को समाप्त होगा. संसद 13 फरवरी को अवकाश के लिए स्थगित होगी और 9 मार्च को फिर से शुरू होगी, ताकि स्थायी समितियां विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की अनुदान मांगों की जांच कर सकें.
