scorecardresearch
Thursday, 6 August, 2026
होमदेशपरीक्षा विवाद में घिरी ब्लैकलिस्टेड कंपनी ने टेंडर ही नहीं भरा था, जांच में खुलासा—सीधे मिला था ठेका

परीक्षा विवाद में घिरी ब्लैकलिस्टेड कंपनी ने टेंडर ही नहीं भरा था, जांच में खुलासा—सीधे मिला था ठेका

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाएं कराने वाली टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड को 2024 में तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया गया था.

Text Size:

नई दिल्ली: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाएं कम से कम 2025 से शुरू होकर पूरी प्रक्रिया के साथ कराने की जिम्मेदारी जिस टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) को दी गई थी, उसे 2024 में तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया गया था. इसके बावजूद इस आईटी कंपनी को बिना टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लिए ही परीक्षा कराने का ठेका दे दिया गया. दिप्रिंट को मिली जानकारी के मुताबिक, कंपनी को सीधे “नॉमिनेशन” के आधार पर यह काम सौंपा गया.

यहीं पर गड़बड़ी खत्म नहीं हुई.

झारखंड अपराध जांच विभाग (सीआईडी) की जांच में सामने आया है कि JPSC प्रारंभिक परीक्षा की आंसर-की कथित तौर पर परिणाम घोषित होने से एक महीने पहले ही व्हाट्सऐप के जरिए टीडीपीएल के कर्मचारियों को भेज दी गई थी.

जांच एजेंसियों को शक है कि इस आंसर-की का इस्तेमाल उन ओएमआर शीटों में जवाब भरने के लिए किया गया, जिनमें उम्मीदवारों ने कुछ सवाल खाली छोड़ दिए थे.

सीआईडी सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान रांची स्थित टीडीपीएल के दफ्तर से फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (FRO) परीक्षा की उम्मीदवारों द्वारा जमा की गई उत्तर पुस्तिकाएं भी मिलीं. जबकि कंपनी के पास इन्हें रखने का कोई वैध कारण नहीं था.

जेपीएससी ने जनवरी में FRO भर्ती परीक्षा कराई थी.

पूछताछ के दौरान TDPL के एक कर्मचारी ने कथित तौर पर जांचकर्ताओं को बताया कि परीक्षा कराने में शामिल कंपनी के कर्मचारियों ने ही ये उत्तर पुस्तिकाएं कंपनी के दफ्तर भेजी थीं.

दिप्रिंट ने इस मामले में JPSC को ईमेल के जरिए विस्तृत सवाल भेजे हैं. उनकी ओर से जवाब मिलने पर खबर को अपडेट कर दिया जाएगा.

19 अप्रैल को ग्रुप ए और ग्रुप बी सिविल सेवा के 103 पदों के लिए हुई JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के बढ़ते आरोपों के बाद झारखंड गृह विभाग की सिफारिश पर सीआईडी ने जांच शुरू की थी.

FRO परीक्षा के अलावा JPSC, असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (ACF), फूड सेफ्टी ऑफिसर (FSO), चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर (CDPO) और असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (APP) समेत आधा दर्जन से ज्यादा प्रतियोगी परीक्षाएं भी कराता है.

सीआईडी की जांच के आधार पर 22 जुलाई को एफआईआर दर्ज की गई. इसके बाद JPSC की डिप्टी कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन श्वेता कुमारी गुप्ता समेत अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. सीआईडी ने JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते से भी पूछताछ की है और बुधवार को उनके एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया.

सीआईडी जांच से जुड़े एक सूत्र ने द प्रिंट को बताया, “श्वेता कुमारी गुप्ता ने पूछताछ में बताया कि परीक्षा कराने का वर्क ऑर्डर कंपनी को नॉमिनेशन के आधार पर दिया गया था. इसके लिए कोई टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाई गई.”

सीआईडी ने गुप्ता से पूछा कि क्या कंपनी का कोई बैकग्राउंड चेक किया गया था? क्योंकि जेएसएससी ने सितंबर 2024 में हुई संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा के टेंडर की शर्तों का पालन न करने और गड़बड़ियों के कारण कंपनी को तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया था. साथ ही कंपनी के निदेशकों को पहले उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) भी एक प्रवेश परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में गिरफ्तार कर चुकी थी.

सीआईडी की जांच में यह भी सामने आया कि TDPL को परीक्षा कराने की पूरी “एंड-टू-एंड” जिम्मेदारी दी गई थी. यानी पूरी परीक्षा प्रक्रिया उसी के हाथ में थी. इससे किसी तरह का जांच और निगरानी (चेक एंड बैलेंस) का सिस्टम नहीं बचा. सीआईडी अधिकारियों के मुताबिक, यह बेहद गंभीर मामला है और इसकी गहराई से जांच की ज़रूरत है.

सूत्र के मुताबिक, एक DSP स्तर के अधिकारी ने सीआईडी प्रमुख मनोज कौशिक को दी अपनी रिपोर्ट में लिखा, “पूछताछ में श्वेता कुमारी गुप्ता ने बताया कि उनके स्तर पर कंपनी का कोई बैकग्राउंड चेक नहीं किया गया. फाइल पर मंजूरी मिलने के बाद नॉमिनेशन के आधार पर एजेंसी को काम दे दिया गया.”

रिपोर्ट में आगे कहा गया, “JPSC जैसी महत्वपूर्ण संस्था की संवेदनशील परीक्षाओं का ठेका तय नियमों का पालन किए बिना ऐसी कंपनी को देना, गंभीर संदेह पैदा करता है और इसकी जांच ज़रूरी है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें: 2 मंच, 8 भूख हड़ताल, और एक मांग: झारखंड में छात्र JPSC-JSSC पेपर लीक के खिलाफ कैसे लड़ रहे हैं


 

share & View comments