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Saturday, 28 March, 2026
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राजस्थान में निवेश सुगम बनाने में विफल है भाजपा सरकार : कांग्रेस का आरोप

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जयपुर, 27 मार्च (भाषा) कांग्रेस नेता गोविंद सिंह डोटासरा और टीकाराम जूली ने राजस्थान में निवेश सुगम बनाने में विफल रहने को लेकर शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार पर निशाना साधा।

इन नेताओं ने फ्रांसीसी राजदूत द्वारा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को लिखे गए कतिपय पत्र का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार ‘राइजिंग राजस्थान’ के नाम पर वाहवाही लूटने का काम कर रही है और निवेशकों को मदद करने की इसकी सोच ही नहीं है।

कांग्रेस नेताओं ने भारत में फ्रांस के राजदूत थियरी माथौ के इस पत्र को सोशल मीडिया पर साझा किया। उन्होंने दावा किया कि ‘राइजिंग राजस्थान’ निवेश शिखर सम्मेलन के दौरान हुए समझौते और मुख्यमंत्री के साथ सकारात्मक चर्चाओं के बावजूद फ्रांसीसी कंपनी ‘सौफले माल्त इंडिया’ को अपनी प्रस्तावित परियोजना के लिए जमीन नहीं मिल सकी है।

डोटासरा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट किया, ‘‘फ्रांस की कंपनी सौफले माल्त इंडिया ने राजस्थान की निवेश नीति की असल तस्वीर सामने लाकर रख दी है। अगर मुख्यमंत्री स्तर पर बातचीत के बाद भी निवेश धरातल पर नहीं उतर रहा तो यह सीधे-सीधे तंत्र की मंशा पर बड़ा सवाल है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘शिखर सम्मेलन में समझौता होने और मुख्यमंत्री भजनलाल जी से सकारात्मक चर्चा के बाद भी अगर विदेशी कंपनी ज़मीन के लिए भटक रही है, तो इसके क्या मायने हैं? आखिर कौन हैं जो फाइल रोककर बैठा है? किसके इशारे पर निवेश अटकाया जा रहा है? क्या निवेशकों को जानबूझकर उलझाकर ‘सेटिंग’ के लिए मजबूर किया जा रहा है, ताकि सौदेबाजी हो सके?’’

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि फ्रांस के राजदूत का मुख्यमंत्री शर्मा को लिखा पत्र बेहद गंभीर तथ्य की ओर इशारा कर रहा है कि जिन बातों पर सहमति हुई उसके बावजूद निवेशक को जमीन के लिए तरसाया जा रहा है, ऐसी स्थिति पैदा कर रहे हैं कि निवेशक दूर हो जाएं।

उन्होंने कहा, ‘‘यह पूरा प्रकरण राजस्थान की छवि पर बट्टा लगाता है। ये ‘राइजिंग राजस्थान’ असल में ‘जॉक ऑफ राजस्थान’ बन गया है।’’

दोनों नेताओं द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए इस कतिपय पत्र के अंशों के अनुसार, फ्रांसीसी कंपनी को राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास व निवेश निगम (रीको) के साथ भूमि अधिग्रहण पर बातचीत में ‘‘बड़ी कठिनाइयों’’ का सामना करना पड़ा। इसमें कहा गया कि रीको ने पहले चर्चा की गई कीमत से कहीं अधिक दर पर भूमि प्रस्तावित की और आवंटन की समयसीमा भी बढ़ा दी।

20 मार्च को लिखे गए पत्र के अनुसार, ‘‘इन शर्तों से इस परियोजना को गंभीर जोखिम पैदा होता है और इससे अनिश्चितता भी पैदा होती है।’’

भाषा पृथ्वी गोला

गोला

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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