मुंबई, 28 जनवरी (भाषा) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद, राज्य विधानसभाओं और जमीनी स्तर की लोकतांत्रिक निकायों के बीच अधिक संवाद की जरूरत के साथ ही उनके द्वारा प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल पर रविवार को जोर दिया।
बिरला ने 84वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि तकनीक की राह विधायिकाओं के लिए भविष्य की राह है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘एक राष्ट्र, एक विधायी मंच’ के दृष्टिकोण को इस साल साकार किया जाएगा।
इस सम्मेलन में पांच प्रस्ताव स्वीकार किए गए जिसमें से एक देश में विधायी संस्थाओं को उत्पादकता में सुधार लाने तथा नागरिकों के साथ भागीदारी बढ़ाने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाना तथा उन्हें बढ़ावा देने की सिफारिश करना शामिल है।
लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने कहा कि इस सम्मेलन में पीठासीन अधिकारियों ने लोकतांत्रिक निकायों को जनता से जोड़ने और उन्हें अधिक जवाबदेह तथा पारदर्शी बनाने की कार्य योजनाओं पर चर्चा की।
बिरला ने विधायिकाओं को अधिक प्रभावी तथा दक्ष बनाने के लिए प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल पर भी जोर दिया।
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