scorecardresearch
Thursday, 13 June, 2024
होमदेशस्वर्ण मंदिर के ग्रंथी रहे, खालिस्तान-समर्थक बिक्रमजीत को वियना के सिखों ने किया बेनकाब; भारत में प्रत्यर्पित

स्वर्ण मंदिर के ग्रंथी रहे, खालिस्तान-समर्थक बिक्रमजीत को वियना के सिखों ने किया बेनकाब; भारत में प्रत्यर्पित

बिक्रमजीत सिंह पर कथित तौर पर 2019 में अमृतसर के तरन तारन में एक विस्फोट में शामिल होने का आरोप लगाया गया था, जिसके बाद वह उसी साल ऑस्ट्रिया भाग गया था. एनआईए उसे पिछले हफ्ते वापस लेकर आई है.

Text Size:

नई दिल्ली: पिछले हफ्ते ऑस्ट्रिया से प्रत्यर्पित किए गए कथित खालिस्तान समर्थक बिक्रमजीत सिंह पर वियना में स्थानीय गुरुद्वारों में युवाओं को कट्टरपंथी बनाने का आरोप लगाया गया है. दिप्रिंट को मिली जानकारी के अनुसार, ऑस्ट्रिया में सिखों ने उसकी गतिविधियों को ‘संदिग्ध’ पाया था और पुलिस को उसकी जानकारी दी थी.

खुफिया सूत्रों ने बताया कि कभी सरकार विरोधी चरमपंथ का केंद्र रहे भारत के एक सिख शिक्षण संस्थान दमदमी टकसाल का अनुयायी बिक्रमजीत कभी अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में ग्रंथी के रूप में काम करता था. सूत्रों ने कहा कि तब इस 30 साल के शख्स ने कथित तौर पर पंजाब में हमला करने के लिए एक आतंकी गिरोह बनाया हुआ था.

एक सूत्र ने बताया, ‘उसने न सिर्फ युवाओं को आतंकवादी वारदातों को अंजाम देने के लिए उकसाया, बल्कि इम्प्रोवाइज़्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेज (IED) बनाने और उनका इस्तेमाल करने का प्रशिक्षण भी दिया था. जब उसे ऑस्ट्रिया में गिरफ्तार किया गया तो वह वहां भी अपना आधार बढ़ाने के लिए ऐसा ही करने की कोशिश कर रहा था.’

सूत्रों ने कहा कि बिक्रमजीत पर 2019 में कथित तौर पर अमृतसर के तरन तारन में एक विस्फोट में शामिल होने का आरोप लगाया गया था, जिसके बाद वह उसी साल ऑस्ट्रिया भाग गया था. जांच से पता चला है कि इस मामले में पाकिस्तान के तार भी जुड़े हैं.

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के सूत्रों ने कहा कि स्वर्ण मंदिर के पूर्व ग्रंथी को पिछले साल मार्च में ऑस्ट्रिया में गिरफ्तार किया गया था और तब से वह हिरासत में था.

अच्छी पत्रकारिता मायने रखती है, संकटकाल में तो और भी अधिक

दिप्रिंट आपके लिए ले कर आता है कहानियां जो आपको पढ़नी चाहिए, वो भी वहां से जहां वे हो रही हैं

हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.

अभी सब्सक्राइब करें

सूत्रों ने बताया कि उसकी प्रत्यर्पण प्रक्रिया पूरी होने के बाद एनआईए की एक टीम उसे भारत वापस लेकर आई है. इसमें दो साल का समय लग गया. ऑस्ट्रिया की लिंज़ रीजनल कोर्ट ने इसके लिए आदेश पारित किया था.

ऊपर उद्धृत स्रोत ने कहा, ‘ऑस्ट्रिया सरकार ने उसकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी हुई थी और एनआईए ने भी इस मामले का पीछा करना नहीं छोड़ा था. एजेंसी ऑस्ट्रिया के समकक्ष अधिकारियों के साथ जानकारी साझा करता रहा और आखिरकार प्रत्यर्पण हासिल कर ही लिया.’


यह भी पढ़ेंः जर्मनी को नव-नाज़ियों से बड़ा खतरा तो नहीं है, मगर लोकतांत्रिक देश ऐसे खतरों की अनदेखी नहीं कर सकते


‘डेरा मुरादपुरा को निशाना बनाना चाहता था’

5 सितंबर 2019 को तरन तारन के पंडोरी गोला गांव के बाहरी इलाके में एक खाली प्लॉट में विस्फोट हुआ था, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई और तीसरा गंभीर रूप से घायल हो गया था. पुलिस ने कथित रूप से छुपाए गए विस्फोटकों को निकालने के लिए एक गड्ढा खोद रहे युवकों के रूप में हरजीत, गुरजंत, विक्रम और हरप्रीत की पहचान की थी.

पंजाब पुलिस ने बिक्रमजीत के ग्रुप के आठ सदस्यों को गिरफ्तार कर दावा किया था कि इन्होंने अतीत में भी आतंकवादी हमलों का प्रयास किया था और तरन तारन में वह ऐसी ही एक और तैयारी कर रहे थे.

एनआईए सूत्रों के अनुसार, मामले के ‘राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फैलाव’ और अमेरिका के खालिस्तान समर्थक अलगाववादी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ (एसएफजे) के आरोपियों के संदिग्ध लिंक के मद्देनजर’ उसी साल सितंबर में एनआईए ने मामले को फिर से रजिस्टर किया था.

2020 में एनआईए की ओर से दायर चार्जशीट के मुताबिक, बिक्रमजीत सहित तरन तारन मामले के अन्य आरोपियों ने मुरादपुरा में एक डेरे को निशाना बनाने की योजना बनाई थी और हमले की तारीख तय करने के लिए कई गुप्त बैठकें भी की थीं.

जांच के दौरान एनआईए ने यह भी पाया कि सिंह ने अपने सहयोगियों के साथ सोशल मीडिया पर युवाओं से संपर्क किया और उनका ब्रेनवॉश करके ‘अलगाववादी गतिविधियों’ को अंजाम दिया. एनआईए के सूत्रों ने दावा किया कि अमृतसर के स्थानीय गुरुद्वारों में भी उसका संपर्क था, जहां वह अक्सर ‘पंजाब को भारत से अलग करने’ के विचार को आगे बढ़ाने के लिए युवाओं से मिलता था और उनके साथ जुड़ता था.

ऊपर उद्धृत स्रोत ने कहा, ‘सिर्फ गुरुद्वारों में ही नहीं, वह अपने लक्ष्य पर निशाना साधने के लिए (सिखों द्वारा निकाले गए) जुलूसों में भी जाता था. कई अलग-अलग जुलूसों और आंदोलनों के दौरान बिक्रमजीत बम लेकर चलता था और उसमें हिस्सा लेने वाले अन्य लोगों को बड़े पैमाने पर आबादी में आतंक फैलाने के लिए सरकारी एजेंसियों पर हमला करने के लिए उकसाता था.

उन्होंने बताया, ‘मामले में हमारी जांच से यह भी पता चला है कि उसने और उसके सहयोगियों ने देशी बम बनाकर उच्च राजनीतिक पहुंच रखने वाले जाने-माने व्यक्तियो, उपदेशकों, पुलिसकर्मियों और स्थानीय नेताओं को निशाना बनाने की योजना बनाई थी. उसे आईईडी बनाने की ट्रेनिंग ली हुई थी और दूसरों को भी इसमें प्रशिक्षित किया करता था.’

पंजाब पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार, सिंह अपने विस्फोटकों के लिए सामग्री हकीमा गेट के पास और अमृतसर के पुराने शहर के लोहगढ़ इलाकों से मंगवाता था.

अधिकारी ने बताया, ‘जून, 2016 के पहले सप्ताह और उसके बाद मनाए गए घल्लूघरा सप्ताह (ऐतिहासिक सिख नरसंहार की स्मृति में आयोजित एक कार्यक्रम) के दौरान उसने एक धार्मिक स्थल पर संगठन के अधिकांश सदस्यों को सफलतापूर्वक कट्टरपंथी बना दिया था. उसने पंजवार गांव में अपने घर पर कट्टरपंथी संगठन के सदस्यों को आईईडी बनाने की ट्रेनिंग भी दी थी.’

उन्होंने कहा, ‘उन्हें कट्टरपंथी बनाने और प्रेरित करने के बाद, वह आईईडी बनाने की ट्रेनिंग देने के अलावा, निम्न-श्रेणी के विस्फोटकों की सोर्सिंग और संगठन के प्रमुख सदस्यों को आईईडी की स्पलाई किया करता था.’

इस मामले में पकड़े गए लोगों की पहचान हरजीत सिंह, मनप्रीत सिंह मान, चनदीप सिंह खालसा, मलकियत सिंह, मनदीप सिंह, अमृतपाल सिंह, अमरजीत सिंह और गुरजंत सिंह के रूप में की गई थी. भागने वालों में गुरप्रीत सिंह और गुरविंदर सिंह शामिल हैं. बताया जा रहा है कि दोनों कैलिफोर्निया में हैं. सोढ़ी सिंह आर्मेनिया में और बिक्रमजीत सिंह ऑस्ट्रिया में था, जिसे अब एनआईए भारत वापस ले आया है.

‘पाकिस्तान से लिंक’

पंजाब पुलिस के सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान तरनतारन मामले और पाकिस्तान के बीच मजबूत संबंध सामने आए हैं.

पंजाब पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘जांच के दौरान पाकिस्तान और एसएफजे के सदस्यों के मजबूत संबंध सामने आए हैं. आरोपियों में से एक चनदीप सिंह पाकिस्तान स्थित एक व्यक्ति (पुलिस द्वारा उस्मान के रूप में पहचाना गया) के नियमित संपर्क में पाया गया था. इसने पहले 2018 में फेसबुक पर उससे संपर्क किया था.’

अधिकारी ने बताया, ‘उस्मान खालिस्तान और भारत सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 (कश्मीर में) को निरस्त करने से जुड़े व्हाट्सएप मैसेज चनदीप को भेजता था. तब वह गब्बर सिंह (चनदीप का उपनाम) को खालिस्तान के एक अलग राज्य की स्थापना के लिए काम करने और कश्मीरी जेहादियों के साथ एकजुट होने के लिए प्रेरित करता था. चनदीप की संपर्क सूची में कई पाकिस्तानी नंबर भी पाए गए हैं.’

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ेंः राजा पटेरिया के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश, ‘मोदी की हत्या करने’ का दिया था बयान


 

share & View comments