पटना, 30 मार्च (भाषा) जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार द्वारा बिहार विधान परिषद की सदस्यता छोड़ने के फैसले के बाद राज्य के नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
नीतीश कुमार के करीबी सहयोगी पिछले कुछ समय से संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए संकेत दे रहे हैं कि कोई व्यक्ति विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य न रहने के बाद भी छह महीने तक मुख्यमंत्री पद पर बना रह सकता है। वरिष्ठ मंत्री श्रवण कुमार जैसे नेताओं के इस तरह के बयानों ने इन अटकलों को और हवा दी है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि जद (यू), जिसके पास भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से केवल चार विधायक कम हैं, अपने सहयोगी दल को मुख्यमंत्री पद का दावा करने की अनुमति देने से पहले कड़ा रुख अपना सकती है।
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सूत्रों का हालांकि कहना है कि नीतीश कुमार, जिन्हें अगले महीने की शुरुआत में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ दिलाई जा सकती है, लंबे समय तक सत्ता में बने नहीं रहेंगे। उनका मानना है कि हिंदू पंचांग के अनुसार अशुभ माने जाने वाले खरमास (14 अप्रैल तक) के बाद ही नेतृत्व परिवर्तन संभव है।
भाजपा खेमे में अपने ‘खुद के मुख्यमंत्री’ मिलने की संभावना को लेकर उत्साह है। हिंदी पट्टी के इस प्रमुख राज्य में लगभग दो दशकों से सत्ता में साझेदार रहने के बावजूद भाजपा को अब तक मुख्यमंत्री पद नहीं मिला है।
मुख्यमंत्री पद के संभावित दावेदारों में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है, जिनके पास गृह विभाग भी है। चौधरी कोइरी समुदाय से आते हैं, जो राज्य का एक प्रभावशाली अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय है और अब तक किसी एक दल के साथ स्थायी रूप से नहीं जुड़ा रहा है। इसके विपरीत यादव समुदाय को लालू प्रसाद के राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का मजबूत समर्थक माना जाता है, जबकि कुर्मी समुदाय नीतीश कुमार को अपना नेता मानता रहा है।
इसके अलावा नित्यानंद राय का नाम भी चर्चा में है, जो पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रह चुके हैं और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत हैं। ऐसा माना जाता है कि उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का समर्थन प्राप्त है।
भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि सम्राट चौधरी को संघ के भीतर उतना समर्थन नहीं मिल सकता, क्योंकि वह 2017 में भाजपा में शामिल होने से पहले करीब दो दशक तक राजद और जद(यू) में रहे हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, नए मुख्यमंत्री का चयन विधायकों की बैठक में किया जाएगा, लेकिन अंतिम फैसला दिल्ली नेतृत्व द्वारा ही लिया जाएगा। इसके उदाहरण के तौर पर राजस्थान का जिक्र किया जा रहा है, जहां पहली बार विधायक बने भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाया गया था।
वहीं, जद(यू) के सूत्रों का कहना है कि वे नई सरकार में “उचित हिस्सेदारी” पर जोर देंगे। साथ ही, हाल ही में पार्टी में सक्रिय हुए नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री पद के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है।
भाषा
कैलाश रवि कांत
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